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धोनी की कप्तानी में वो 5 खिलाड़ी जिनका करियर नहीं ऊभर पाया…

टीम इंडिया के सबसे बेहतरीन कप्तान जो टीम इंडिया को विश्व कप, चैंपियन ट्रॉफी से लेकर हर छोटा सा बड़ा खिताब भारत को दिलाने वाले धोनी ही है। जिस तरह की कामयाबी धोनी ने बतौर कप्तान हासिल की है वो इससे पहले किसी को भी नसीब नहीं हो पाई है आगे का तो कह नहीं सकते।

अपनी कप्तानी के दौरान धोनी ने टीम इंडिया को सबसे बेहतरीन टीम बना दिया। क्रिकेट की तीनों फॉर्मेट में किसी भी दूसरी टीम के लिए भारत को हरा पाना मुश्किल हो गया था। कई खिलाड़ी धोनी की कप्तानी में जमीन से आसमान पर पहुंचे हांलाकि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि धोनी की कप्तानी में कुछ खिलाड़ियों को ज्यादा मौका मिलता तो ये खिलाड़ी अपने करियर को ऊंचाइयों पर ले जा सकते थे। तो उन खिलाड़ियों पर नजर डालते है-

सौरभ तिवारी

साल 2008 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करने की वजह से, और बाद में आईपीएल में विस्फोटक बल्लेबाजी करने के बाद झारखंड के बल्लेबाज सौरभ तिवारी की नजर टीम इंडिया की तरफ बढ़ती जा रही थी। दिसंबर 2010 में उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे खेलने के का मौका मिला लेकिन वो महज 12 रन ही बना सके। हांलाकि न्यूज़ीलैंड के खिलाफ उन्होंने अपने दूसरे मैच में 39 गेंद में 37 रन बनाया था। जिसमें 4 चौके और 1 छक्का शामिल था। इसके बाद वो सिर्फ 1 और वनडे मैच ही खेल पाए। उस वक्त टीम इंडिया में रैना और पठान ने अपनी जगह बना ली थी।

जोगिंदर शर्मा

जोगिंदर शर्मा को 2007 के आईसीसी वर्ल्ड टी-20 के फाइनल मैच की आखिरी ओवर फेंकने के लिए याद किया जाएगा। इस साल धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने पहला वर्ल्ड टी-20 खिताब जीता था। हर किसी को ये लगा था कि सीमित ओवर के खेल में जोगिंदर का करियर शानदार होगा। क्योंकि उस वक्त वो महज 23 साल के थे और उम्मीद की जा रही थी कि वो टीम इंडिया के सितारे बनेंगे। इसके बाद शर्मा ने कभी भी भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला।

उस वक्त नए खिलाड़ियों की भीड़ में जोगिंदर कहीं खो से गए थे। धोनी ने कई युवा खिलाड़ियों को मौका दिया था। साल 2007 के बाद जोगिंदर का करियर कभी आगे नहीं बढ़ पाया और वो क्रिकेट की चकाचौंध से बाहर हो गए।

विनय कुमार

कर्नाटक के गेंदबाज विनय कुमार घरेलू सर्किट के सबसे निरंतर गेंदबाज रहे हैं। वो पहली बार साल 2004-05 के दौरान घरेलू क्रिकेट में आए थे। उनकी स्विंग की क्षमता और सटीक गेंदबाजी करने का हुनर ही उनको साल 2010 के आईपीएल के टूर्नामेंट में पहुंचा दिया। इसके बाद विनय को भारत की तरफ से जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे खेलने का मौका मिला था।

घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद वो अंतरराष्ट्रीय मैदान में खास प्रदर्शन नहीं कर पाए। हांलाकि धोनी ने उन्हें 34 वनडे मैच खेलने का मौका दिया था, लेकिन वो मौके का पूरा फायदा उठाने में नाकाम रहे।

उमेश यादव

टीम इंडिया को हमेशा से एक अच्छे तेज गेंदबाज़ों की तलाश रही है। साल 2008-09 के घरेलू सीजन में उमेश यादव 140 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंद फेंकते थे। उन्होंने साल 2010 में भारतीय वनडे टीम में जगह हासिल कर ली थी। इसके बाद में वो टेस्ट प्लेयर भी बन गए थे। हांलाकि धोनी की कप्तानी में वो उतने बेहतर गेंदबाज नहीं बन पाए जितनी उनसे उम्मीद की जा रही थी। टेस्ट क्रिकेट में वो विकेट के लिए संघर्ष करते दिखे।

 

यूसुफ पठान

बड़े पठान को धोनी की तरह ही रिस्क लेना पसंद है। धोनी ने ही अपनी कप्तानी में यूसुफ पठान को मौका दिया था। पठान टीम इंडिया के सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में से एक रहे हैं। उनका करियर आईपीएल में खूब चमका था। उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी की वजह से राजस्थान रॉयल्स को आईपीएल ख़िताब दिलाया था। वो हर तरह के गेंदबाजों पर आक्रमण करने में माहिर रहे हैं। हांलाकि वो वनडे में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने में नाकाम साबित हुए और उन्हें टीम इंडिया से बाहर होना पड़ा।

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