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7 कारण जिसके लिए मनोहर पर्रिकर हमेशा किए जाएंगे याद!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनोहर पर्रिकर को साल 2014 में भारत के रक्षा मंत्री के रूप में चुना था, और तब से पर्रिकर मोदी कैबिनेट में टॉप और एक्टिव मंत्रियों में से एक साबित हुए थे। कई सालों से लटके राफेल सौदे को लागू कर पर्रिकर ने इशारा कर दिया था कि वो भारतीय सेना के मामले में बकवास सुनना पसंद नहीं करेंगे। वे राजनाथ सिंह और अरुण जेटली की तरह कड़ी निंदा और आलोचना में यकीन नहीं रखते थे।

उन्होंने म्यांमार हमला और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद दुनिया को दिखा दिया था कोई भी देश भारत को हल्के में नहीं ले सकता है। मनोहर पर्रिकर ने तीन बार गोवा के मुख्यमंत्री की कमान संभाली और 63 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। पर्रिकर को पढ़े लिखे, ईमानदार और शालीनता से भरे राजनेता माने जाते थे। तो चलिए इनके बारे में 7 ऐसी बातें भी जान लेते हैं जिनकी वजह से उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

1. मनोहर पर्रिकर आग से लड़ने के लिए आग को हथियार बनाने में यकीन रखते थे

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© BCCL

पर्रिकर ने एक स्टेटमेंट में कहा था- “ भारत में बंदूक के साथ आने वाले आतंकवादी को मानव अधिकार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। जरूरत पड़ी तो हम आतंकवादियों को आतंकवाद से बेअसर करेंगे।“

उनके इस रुख से स्पष्ट था कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर नरम रास्ता अपनाने में विश्वास नहीं करते थे। म्यांमार और उरी का बदला इसके उदाहरण थे।

2. वह एक प्रभावी, कुशल और कोई बकवास ना करने वाले प्रशासक थे

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© Reuters

मनोहर पर्रिकर लगभग 25 सालों से ज्यादा BJP और RSS के लिए गोवा में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे, और उन्होंने अपने संगठन के कामों को बड़ी लगन से पूरा किया। वो गोवा में काम करने व काम करवाने के मामले में सख्त माने जाते थे और ‘आम आदमी’ से जुड़े मुद्दों पर कड़ी नजर रखते थे। उन्होंने अपनी नो-बकवास वाली इमेज रक्षा मंत्रालय तक पहुंचाई, यही वजह थी कि पूरे डिपार्टमेंट की काम करने की क्षमता बढ़ गई थी।

3. वह भारत में राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले पहले IIT ग्रेजुएट थे

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वह केजरीवाल से भी पहले किसी भारतीय राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले पहले IITian थे। उनके पास IIT बॉम्बे के उस शानदार बैच में एक बैचमेट के रूप में इन्फोसिस के सह-संस्थापक और पूर्व CEO नंदन नीलेकणि भी थे।

4. पर्रिकर एक राष्ट्रवादी, देशभक्त और साफ छवि वाले व्यक्ति थे

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मनोहर पर्रिकर को जब राज्य से निकाल कर देश सेवा के लिए बुलाया गया तब उन्हें अपने परिवार को गोवा में ही छोड़ना पड़ा था। पर्रिकर को PM नरेंद्र मोदी द्वारा भारत का अगला रक्षा मंत्री बनने के लिए आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा, पर्रिकर ने अपने पूरे राजनीतिक करियर में एक साफ-सुथरी छवि बनाए रखी और यही उन्हें राज्य में या मोदी कैबिनेट में बेहतर और बेदाग मंत्रियों में से एक बनाता था।

5.  उनके काम निर्णायक थे

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चाहे वह राफेल जेट सौदा हो या OROP लागू करवाना, पर्रिकर का कार्यकाल राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित अहम मुद्दों से निपटने में बेहद सक्रिय रहा है।

6. मनोहर पर्रिकर सरकारी शान शौकत से दूर थे

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मनोहर पर्रिकर अपनी साइकिल से गोवा विधानसभा की यात्रा करने के लिए जाने जाते थे और उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद सभी सरकारी लाभों से इनकार कर दिया। उन्होंने CM बनने के बाद भी अपनी पुरानी इनोवा का इस्तेमाल करने पर जोर दिया।

7. मनोहर पर्रिकर ने कहा था अंतिम सांस तक गोवा की सेवा करूंगा

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2000 में गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से एक महीने पहले, उनकी पत्नी का कैंसर के कारण निधन हो गया। अपनी प्यारी पत्नी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए, दो किशोर लड़कों के माता-पिता की भूमिका निभाते हुए पर्रिकर ने पूरी जिम्मेदारी के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पर्रिकर तीन बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे। अतिंम समय में पर्रिकर कैंसर से जूझ रहे थे। बीमार हालत में जनवरी 2019 में उन्होंने गोवा का बजट पेश किया और कहा- “मैं पूरे ‘होश और जोश’ में हूं और अंतिम सांस तक गोवा की सेवा कंरूगा” और उन्होंने ऐसा कर दिखाया। मनोहर पर्रिकर ने 63 साल की उम्र में जिन्दगी से जंग हार कर दुनिया को अलविदा कह दिया।

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