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जिंदगी के लिए कितना जरूरी ‘आधार’

सोचिए यदि रुपये चलना बंद हों जाएं तो क्या होगा..? तो आपके संबंध चलेंगे जिसका नजारा  हम पिछले साल हुई नोटबंदी (demonetization) में देख चुके हैं, जब 1000, 500 के नोट नहीं चल रहे थे तब आपके दूधवाले, सब्जीवाले, किराना वाले सभी ने इन नोटों की जगह एक-दूसरे के भरोसे का लेनदेन किया। इंसान का दर्द इंसान ही जान पाता है ना कि मशीन हो चुका आदमी।

नीति आयोग ने महज एक सुझाव दिया था कि आधार (Aadhaar) स्वास्थ्य सेवाओं में भी जरूरी किया जाए, लेकिन हरियाणा के एक अस्पताल में वहां के कर्मचारियों ने इसे पत्थर की लकीर मान लिया और एक गर्भवती महिला को आधार नहीं होने की वजह से भटकने को मजबूर कर दिया, इतना मजबूर.. कि वो महिला अस्पताल के गेट पर प्रसव पीड़ा से तड़पती रही और उसका पति आधार के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक चक्कर काटता रहा, लेकिन मशीन हो चुके वहां के कर्मचारियों को फिर भी तरस नहीं आया।

जैसा कि इंसान का दर्द इंसान ही जान पाता है तो यहां भी पीड़ित महिला का दर्द आस-पास खड़ी महिलाओं ने ही जाना जिसके बाद महिलाएं आगे आईं और चादर के पर्दे बनाए गए और फिर अस्पताल के गेट पर ही बच्चे की किलकारी गूंजी। अच्छी बात ये रहीं कि जच्चा और बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हैं, लेकिन सवाल वही है कि क्या आधार किसी की जान से बढ़कर जरूरी हो सकता है?

नीति आयोगा का सुझाव था कि OPD आधार से लिंक हो, लेकिन अस्पतालों ने एक कदम आगे बढ़कर इसे डिलीवरी जैसी इमरजेंसी सेवाओं में भी लागू कर दिया।

ऐसे ही आधार के शिकार कुछ मामले अन्य राज्यों से भी आए हैं। झारखंड के सिमडेगा में आधार और राशन कार्ड लिंक ना होने की वजह से संतोषी को राशन नहीं मिला, जिसके कारण उसके घर में 4 दिन चूल्हा नहीं जल पाया और उसकी 10 साल की मासूम बच्ची भूख से बिलखती ‘भात-भात’ (चावल) कहते हुए दुनिया छोड़ गई।

इसी तरह दिल्ली के मालवीय नगर का 8 साल का नितिन कोली भूखे मरने पर मजबूर है, क्योंकि वह ऑटिस्टिक से पीड़ित है और इस के चलते वह आधार कार्ड के लिए फिंगर प्रिंट नहीं दे सकता और बिना आधार लिंक किए PDS (पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) दुकानदार राशन नहीं दे रहा।

बस्तर में एक आदिवासी को जमानत नहीं मिली क्योंकि उसके आधार कार्ड का सत्यापन नहीं हो पाया था। हाईकोर्ट (HC) के आदेशानुसार जमानत के लिए आधार जरूरी है।

ये तो मात्र कुछ उदाहरण हैं उन लोगों की परेशानियों और दर्द का जिन्होंने आधार ना होने की वजह से भुगती हैं। वैसे अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 40 लोग आधार ना होने की वजह से हुई परेशानी के कारण अपनी जान गवां चुके हैं। इसी संबध में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई जारी है।

इससे पहले एक सुनवाई में SC ने कहा भी था कि आधार को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य नहीं किया जा सकता। लेकिन इसके विपरित मोदी सरकार ने 139 जरूरी सेवाओं के लिए आधार लिंक करने की डेडलाइन 31 मार्च 2018 कर दी है। वहीं दूसरी तरफ आधार संख्या जारी करने वाले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का कहना है कि आधार संख्या नहीं होने पर भी किसी को आवश्यक सेवाओं का लाभ देने से मना नहीं किया जा सकता है।

इसमें PDS के तहत राशन मिलना, स्कूलों में प्रवेश और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने जैसी आवश्यक सेवाएं शामिल हैं। आधार एक अच्छा और जरूरी कदम है लेकिन सरकार में बैठे लोगों और प्रशासन को हर हाल में ये समझना ही होगा कि कोई भी आधार किसी की जिंदगी से ज्यादा बढ़कर नहीं हो सकता।

 

नोट: इस लेख को Saurav Yadav ने हमारे प्लेटफॉर्म पर लिखा है और पेशे से ये एक पत्रकार हैं।  यदि आप भी कुछ लिखना चाहते हैं तो फेसबुक पर मैसेज में या theindianclick@gmail.com पर हमें मेल भेज सकते हैं।

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