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भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने किया दुनिया को अलविदा, जानिए राजनीतिक सफर

भारत के तीन बार प्रधाममंत्री रह चुके 93 साल (उम्र) के अटल बिहारी वाजपेयी अब इस दुनिया में नहीं रहे। पिछले 9 हफ्तों से AIIMS में भर्ती वाजपेयी की तबीयत पिछले 24 घंटों से नाजुक बनी हुई थी। उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हो पा रहा था।

इधर PM नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर देश के तमाम बड़े दिग्गजों ने भारत रत्न अटल बिहरी वाजपेयी की मौत पर दुख जताया है। वाजपेयी ऐसे इकलौते नेता माने जाते थे जिनके विरोधी भी प्रशंसक हैं।

साल 2009 में उन्हें स्ट्रोक आया था। इसके बाद वाजपेयी की सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो गई थी। बाद में वो डिमेंशिया से भी पीड़ित हो गए थे। जैसे-जैसे सेहत खराब होती गई, वैसे-वैसे उन्होंने खुद को सार्वजनिक जीवन से दूर कर लिया।

Atal Bihari Vajpayee को इसी साल जून महीने में किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में भर्ती कराया गया था। Atal Bihari Vajpayee 93 साल के थे और उनका जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ था।

BJP के संस्थापकों में शामिल Atal Bihari Vajpayee तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। वाजपेयी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था।

 

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तीन बार बने देश के प्रधानमंत्री

Atal Bihari Vajpayee 10 बार लोकसभा के लिए चुने गए और वे दूसरी लोकसभा से 14वीं लोकसभा तक सांसद रह चुके थे। हालांकि, बीच में कुछ लोकसभाओं से उनकी अनुपस्थिति भी रही। खासतौर से साल 1984 में जब वो ग्वालियर में कांग्रेस के माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) के हाथों पराजित हुए थे।

Atal Bihari Vajpayee साल 1962 से 1967 और 1986 में राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके थे। साल 1966 में 16 मई को अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने। लेकिन लोकसभा में सरकार बनाने के लिए बहुमत साबित न कर पाने की वजह से वाजपेयी ने 31 मई 1996 को त्यागपत्र दे दिया।

 

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इसके बाद वाजपेयी साल 1998 तक लोकसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर रहे। साल 1998 के लोकसभा चुनाव में सहयोगी पार्टियों के साथ उन्होंने लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत साबित कर दिया और एक बार फिर यानी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।

लेकिन AIADMK ने गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले लिया और एक बार फिर उनकी सरकार गिर गई। इसके बाद साल 1999 में एक बार फिर लोकसभा चुनाव हुए। यह चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साझा घोषणापत्र पर लड़े गए और इस चुनाव में वाजपेयी के नेतृत्व को केंद्र में रखा गया था। NDA को बहुमत हासिल हुआ और वाजपेयी ने एक बार फिर (तीसरी बार) प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी।

 

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2005 में वाजपेयी ने सक्रिय राजनीति से सन्यास लिया

साल 1999 से 2004 तक 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद NDA गठबंधन पूरे आत्मविश्वास के साथ Atal Bihari Vajpayee के नेतृत्व में 2005 के चुनाव में उतरा पर इस बार कांग्रेस के नेतृत्व में UPA गठबंधन ने सफलता हासिल की और सरकार बनाने में सफल रही। साल 2005 में मुंबई में एक रैली में Atal Bihari Vajpayee ने सक्रीय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी।

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