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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से जुड़े हर सवाल का पाएं जवाब

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट आ रहा है। अब तो कोर्ट ने भी बोल दिया ओके कर लो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये प्रोजेक्ट क्या है? नई संसद कब तक बनेगी? इसके खिलाफ क्यों है लोग? तो अगर नहीं जानते तो इस आर्टिकल को पूरा पढ़िये और सब कुछ जानिये।

कैसी दिखेगी नई संसद?

नई इमारत 65,400 sq.m में फैली होगी और ये इमारत देशभर के कारीगरों और मूर्तिकारों के संग भारत की सांस्कृतिक विविधता को दिखाएगी। इमारत एक तिकोना ढांचा होगा और इसकी ऊंचाई पुरानी इमारत जितनी ही होगी। इसमें एक बड़ा संविधान हॉल, सांसदों के लिए एक लाउन्ज, एक लाइब्रेरी, कई कमेटियों के लिए कमरे, डाइनिंग एरिया जैसे कई कम्पार्टमेंट होंगे।

जबकि इस नई संसद के लोकसभा चैम्बर में 888 सदस्यों के बैठने की क्षमता होगी, जबकि राज्यसभा में 384 सीट होंगी। अभी फिलहाल लोकसभा में 543 और राज्यसभा में 245 सदस्य है। जो कि माना जा रहा है कि भविष्य में इन सदस्यों की संख्या बढ़ेगी। इसे परिसीमन कहते हैं।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट

इसकी लागत कितनी आएगी? इसका निर्माण कौन कर रहा है?

सितंबर 2020 में इसकी बोली टाटा प्रोजेक्ट्स ने जीती थी। और इसकी लागत 861 करोड़ की थी। इसका निर्माण सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत किया जाएगा।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट है क्या?

सेंट्रल विस्टा राजपथ के दोनों तरफ के इलाकों को कहते हैं। राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के करीब प्रिंसेस पार्क का इलाका इसके अंतर्गत आता है। सेंट्रल विस्टा के तहत राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, उपराष्ट्रपति का घर आता है। इसके अलावा नेशनल म्यूजियम, नेशनल आर्काइव्ज, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (IGNCA), उद्योग भवन, बीकानेर हाउस, हैदराबाद हाउस, निर्माण भवन और जवाहर भवन भी सेंट्रल विस्टा का ही हिस्सा हैं। सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के इस पूरे इलाके को रेनोवेट करने की योजना को कहा जाता है।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से क्यों नाखुश है पर्यावरणविद और इतिहासकार?

सुप्रीम कोर्ट में कम से कम 7 याचिकाएं इस प्रोजेक्ट के खिलाफ दी गई। इसमें जमीन के इस्तेमाल में बदलाव के लिए दी गई मंजूरी भी शामिल है। करीब 80 एकड़ जमीन प्रतिबंधित हो जाएगी और सिर्फ सरकारी अधिकारी उसे एक्सेस कर सकेंगे। अभी ये जमीन पब्लिक के लिए भी खुली है। आर्किटेक्ट्स का तर्क है कि जमीन के इस्तेमाल में बदलाव कानूनी रूप से मान्य नहीं है और जो जगहें पब्लिक के लिए खुली नहीं रहेंगी, उनकी भरपाई करने का कोई प्रावधान नहीं है।

इस प्रोजेक्ट का कोई पर्यावरण ऑडिट नहीं कराया गया है। कम से कम 1000 पेड़ काटे जाएंगे और 80 एकड़ जमीन के ग्रीन कवर की भरपाई करने की कोई योजना नहीं है। जलवायु एक्टिविस्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि निर्माण शुरू होने के बाद दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण में और बढ़ोतरी हो जाएगी।

वहीं इसी तरह प्रोजेक्ट का कोई ऐतिहासिक या हेरिटेज ऑडिट भी नहीं हुआ है। यहां तक कि नेशनल म्यूजियम जैसी ग्रेड 1 हेरिटेज इमारत को भी तोड़ा या उसमें बदलाव किया जाएगा। ये इमारतें आर्किटेक्चरल एक्सीलेंस और नेशनल इम्पोर्टेंस की हैं।

नई संसद का निर्माण कब तक पूरा होगा?

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने 5 नवंबर को कहा कि नई इमारत 2022 के बजट सत्र से पहले पूरी होने की उम्मीद है।

संसद की मौजूदा इमारत का क्या होगा?

मौजूदा इमारत को देश की पुरातत्व धरोहर में बदल दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इसका इस्तेमाल संसदीय कार्यक्रमों में भी किया जाएगा। मौजूदा ढांचा 2021 में 100 साल पूरे कर लेगा। इसका निर्माण एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने किया था। इन दोनों को नई दिल्ली शहर की योजना और निर्माण का जिम्मा दिया गया था। उस समय इसे बनाने में 6 साल और 83 लाख रुपये लगे थे।

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