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शॉपिंग के वक्त कैरी बैग के लिए पैसे देते हैं, तो न दें

अक्सर हम लोग शॉपिंग मॉल या बड़ी दुकानों में खरीदारी करने जाते हैं, तो एक बैग खरीदना पड़ जाता है, जिसके लिए हमें कुछ अतिरिक्त पैसा देना होता है। हम बिना मोल भाव किए उस कैरी बैग के लिए एक्स्ट्रा पैसे भी दे देते हैं, जिससे कंपनी को मुनाफा भी होता है और उसका प्रचार भी होता है।

ये बैग हम खरीदना तो नहीं चाहते लेकिन लेना हमारी मजबूरी बन जाती है, क्योंकि अपने साथ बैग हर वक्त रखना जरूरी नहीं समझते और कभी कोई चीज पसंद आ जाती है तो उसे तुरंत लेने का प्लान कर लेते हैं। लेकिन एक ऐसा मामला हम आपको बताने जा रहे हैं जिसमें एक नामी ब्रांड को 3 रुपये की बैग की वजह से 9 हजार का जुर्माना लग गया है।

बाटा ब्रांड को देना पड़ा जुर्माना

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 22 में बाटा (Bata) कंपनी के साथ हुआ। बाटा के शोरूम को एक ग्राहक से कैरी बैग के लिए एक्सट्रा 3 रुपए वसूलना भारी पड़ गया। चंडीगढ़ कंज्यूमर फोरम ने बाटा को फटकार लगाई है और कैरी बैग के लिए 3 रुपए अलग से चार्ज करने के लिए अलग-अलग तरीको से उस पर 9000 रुपए का ज़ुर्माना भी लगा दिया है।

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Photo Credit: PTI

कंज्यूमर फोरम ने बाटा शोरूम द्वारा न सिर्फ कैरीबैग के लिए चार्ज किए हुए 3 रुपए लौटाने का आदेश दिया है, बल्कि शिकायतकर्ता दिनेश प्रसाद को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के लिए 3 हजार रुपए का मुआवजा और एक हजार रुपए केस खर्च देने के लिए भी कहा है। कंज्यूमर फोरम ने शोरूम को उसके यहां पर आने वाले सभी ग्राहकों को मुफ्त में कैरी बैग देने का आदेश भी दिया है।

कैरी बैग के लिए कंज्यूमर फोरम में हुई थी शिकायत

चंडीगढ़ के सेक्टर-23 में रहने वाले दिनेश प्रसाद ने फरवरी में बाटा के शोरूम से जूते खरीदे थे। जिसके लिए दिनेश ने शोरूम मालिक को 402 रुपए दिए थे। शोरूम मालिक ने दिनेश से कैरी बैग के अलग से 3 रुपए भी लिए थे। शिकायतकर्ता ने जब कैरी बैग के लिए वसूले गए रुपए मांगे तो शोरूम के मालिक ने मना कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कंज्यूमर फोरम में इस घटना की शिकायत कर दी थी।

वहीं, इस मामले पर जी न्यूज को एडवोकेट पंकज चांदगोठिया ने बताया कि अलग-अलग ब्रैंडस द्वारा कैरी बैग के लिए अलग से पैसे लेने पर कंज्यूमर फोरम पहले भी सख्ती दिखा चुका है, लेकिन बड़े ब्रांड्स इन आदेशों को तब तक गंभीरता से नहीं लेते जब तक उनका कोई केस डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल फोरम में ना पहुंचे।

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Photo Credit: rcity.co.in

बाटा की सफाई- कागज का बना है कैरी बैग इस‍लि‍ए लिए पैसे

कंज्यूमर फोरम में सुनवाई के दौरान बाटा शोरूम की तरफ से जबाब में कहा गया कि वो पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल नहीं करते है। लेकिन जो कैरी बैग शिकायतकर्ता को दिया गया वो पेपर का बना हुआ है और मंहगा है, इसलिए इसका अतिरिक्त चार्ज लिया गया।

इस पर कंज्यूमर फोरम का कहना था कि अगर कंपनी पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ऐसा कर रही थी तो उसे कैरी बैग मुफ्त देना चाहिए था। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फोरम ने शोरूम की तरफ से शिकायतकर्ता को बैग के लिए वसूल किए 3 रुपए वापस देने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि हर ग्राहक को फ्री में कैरी बैग दिया जाए।

वहीं, शिकायतकर्ता को हुई परेशानी की वजह से 3 हजार रुपये मुआवजा और एक हजार रुपए केस खर्च देने के लिए भी कहा। कंज्यूमर फोरम ने बाटा शोरूम को फोरम के उपभोक्ता कानूनी सहायता में भी 5000 रुपए जमा करवाने के लिए कहा है।

कंज्यूमर फोरम ने बाटा को फटकार लगाते हुए ये भी कहा कि “एक तो कैरीबैग पर अपने ब्रांड का विज्ञापन करते हो और उसके बाद कैरी बैग देने पर ग्राहकों से पैसे भी वसूलते हो।” कंज्यूमर फोरम ने ब्रांड्स द्वारा ग्राहकों से कैरीबैग के लिए अलग से चार्ज करने को ‘अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस’ बताया है।

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Photo Credit: Google

TIC की राय-

हमारा मानना है कि कंपनी द्वारा ग्राहकों को कैरी बैग मुफ्त देना चाहिए। क्योंकि हम अगर किसी दुकान या मॉल में सामान खरीदते हैं तो ब्रांड या दुकानदार की जिम्मेदारी बनती है कि कैरी बैग के लिए पैसे ना लें।

आपको बता दें कि जब से प्लास्टिक बैग पर रोक लगाई गई है तब से कंपनियों ने पैसे देकर कैरी बैग देने का तरीका निकाल लिया है। अगर हम सब्जी खरीदने जाते हैं या कुछ छोटे-मोटे सामान खरीदते हैं तो इसके लिए घर से बैग ले जाने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन महंगे सामानों के साथ कैरी बैग के लिए पैसे लेना बिल्कुल गलत है।

Shopping carry bag free
Photo Credit: GETTY IMAGES

हालांकि इस केस में कैरी बैग पर कंपनी का नाम लिखा हुआ था, जिस वजह से यह प्रचार का मामला बन गया। लेकिन सवाल है कि अगर कैरी बैग पर कंपनी का नाम ना हो और वो सिर्फ प्लेन कागज हो तो क्या ब्रांड्स द्वारा पैसे लिए जा सकते हैं?

इसका जवाब ये है कि अक्सर आप देखेंगे कि कई शोरूम ऐसे होते हैं जहां अंदर बैग ले जाना मना होता है। इससे समस्या होती है कि कहां बैग लेकर जाना चाहिए और कहां नहीं। कई बार लोग घर से बिना बैग के काम से निकले होते हैं और शॉपिंग के लिए चले जाते हैं। इसलिए कंपनियों द्वारा ग्राहकों को कैरी बैग मुफ्त में ही देना चाहिए।

लोगों को करना चाहिए विरोध

उपभोक्ता फोरम ने तो ग्राहक के हक में फैसला सुनाया लेकिन ग्राहकों की भी जिम्मेदारी है कि कंपनियों को इससे रोकने के लिए आपत्ति करें। कोर्ट के इस फैसले को आप दूसरी कंपनियों के मामले में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

अगर सभी ग्राहक शोरूम में जाकर ये पूछना शुरू करेंगे कि वो कैरी बैग फ्री देते हैं या चार्ज करते हैं? और कहेंगे कि अगर कैरी बैग फ्री है तभी हम शॉपिंग करेंगे, तो इन ब्रांड्स पर असर जरूर पड़ेगा। या कभी ऐसे भी करें कि अगर दुकानदार अतिरिक्त पैसा लेकर (ब्रांड के नाम वाला) कैरी बैग देता है, तो उससे सादा कैरी बैग की मांग करें। दोस्तों बात 2-3 रुपए की नहीं है बल्कि अवैध तरीके से पैसे वसूली की है।

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