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North MCD school devided students into Hindu Muslim

धर्म की शिक्षा या कर्म की… कहां जा रहा है देश का भविष्य?

धर्म के नाम पर बांटने का नशा कुछ इस हद तक चढ़ा हुआ है कि क्या युवा, क्या महिला और क्या बच्चा, इसके दायरे से कोई भी बाहर नहीं है। अब तक हमने कई लोगों को धर्म की आड़ में बहुत कुछ करते हुए देखा है। कहीं पर बंटवारा तो कहीं पर दंगा तो कहीं पर उपद्रव इन सबको धर्म के नाम पर जिस तरह से अंजाम दिया जा रहा है वो हमारे मेक इन इंडिया को बहुत अच्छे से दर्शाता है।

अब तक देश में कम से कम बच्चों के अंदर धार्मिक एकता देखने को मिलती थी। जिसकी तस्वीर नीचे आपको देखने को मिल रही है कि कैसे बच्चे अलग अलग धर्म में एकता दिखा रहे हैं। और ऐसा हो भी क्यों ना असल में भारत अनेकताओं में एकता का देश जो है। हर धर्म, जात, समुदाय को सिर उठा कर जीने का हक हमारा देश देता है। ये किसी नेता, किसी हस्ती का मोहताज नहीं है, ये हक देश का संविधान देता है। \

लेकिन जो बच्चे हमें एकता का पाठ पढ़ाते नजर आते थे वो अब इस राह में आ गए हैं कि उन्हें हिंदू-मुसलमान का पाठ पढ़ाया जा रहा है। बच्चों को हमने अक्सर पढ़ाई के आधार पर बंटता देखा है, जैसे 10वीं कक्षा के बाद होता था साइंस वाले बच्चे अलग होते थे, कॉमर्स वाले अलग लेकिन ये बंटवारा अब मजहबी दीमक की चपेट में आ गया है।

जिस बारे में मैं आपको बता रहा हूं वो किसी गांव-देहात की नहीं है, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली की है। उसी दिल्ली की जहां से पूरा देश चलता है। ये वही दिल्ली है जो कभी नहीं रुकती लेकिन इन बच्चों के साथ जो हुआ उससे इंसानियत जरूर आगे जा कर रुक जाएगी। थम सी जाएगी एकता की मिसाल क्योंकि बच्चों को अब धर्म का पाठ पढ़ाया जा रहा है। जो आगे जा कर कितना घातक साबित हो सकता है, इसका अंदाजा अभी से लगाया जा सकता है।

दरअसल ये घटना दिल्ली के एक स्कूल में हुई है जहां पर बच्चों को अलग अलग सेक्शन में बांट दिया गया, महज इस कारण क्योंकि उनके धर्म अलग अलग थे। इस घटना से जितना आहत मैं हूं, उतना मेरे जैसे और कई लोग होंगे जो आए दिन मजहब के नाम पर हो रहे अत्याचारों की खबरें पढ़ते होंगे और उसके बाद अपना सिर पकड़ कर बैठ जाते होंगे।

हम भारतीयों के लिए एकदम सही बात कही गई है कि न तो हमें पाकिस्तान से खतरा है, न जंग से, हमें तो बस खुद से ही खतरा है क्योंकि हमें मिटाने के लिए बाहरी ताकतों की जरूरत नहीं है। बस 2 बूंद धर्म की और कुछ भड़काऊ भाषण, लीजिए हो गया दंगों का माहौल तैयार और अब कूद पड़ो सड़कों पर अल्लाह और राम के नारे लगाते हुए। जो दिखे उसे काट दो या फिर उसे जला दो, अगर महिला दिखें तो हैवान बनकर रेप कर दो। लेकिन कम से कम उम्मीद थी कि जो आने वाली पीढ़ी है वो इस माहौल में नहीं पड़ेगी।

चलिए अब आपको घटना के बारे में बताता हूं। दरअसल इंडियन एक्सप्रेस में एक रिपोर्ट छपी और उसमें लिखा था कि नॉर्थ एमसीडी के एक स्कूल में धर्म के नाम पर बच्चों का बंटवारा होता है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के कुछ टीचरों ने आरोप लगाया कि वजीराबाद के एक प्राइमरी स्कूल में हिंदू और मुस्लिम बच्चों को अलग-अलग सेक्शन में बैठाया जाता है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वजीराबाद, गली नंबर-9 में नॉर्थ एमसीडी ब्वॉयज स्कूल के अटेंडेंस रिकॉर्ड से इस बात को पता चला है कि धर्म के आधार पर अलग-अलग सेक्शन बने हैं। इस रिपोर्ट की माने तो क्लास-1A में 36 हिंदू, 1B में 36 मुस्लिम, क्लास-2A में 47 हिंदू, 2B में 26 मुस्लिम और 15 हिंदू छात्र है। तो वहीं 2C में 40 मुस्लिम छात्र हैं।

इसी तरह 5वीं क्लास तक हर सेक्शन को हिंदू और मुस्लिम के आधार पर बांटा जाता है। इस स्कूल में कुछ ही सेक्शन ऐसे हैं, जिसमें हिंदू और मुस्लिम बच्चे एक साथ पढ़ाई करते हैं।

यहां तक तो मामला हुआ कि धर्म के आधार पर बच्चे बांटे गए लेकिन हद तो तब पार हुई जब स्कूल के इंचार्ज सीबी सिंह शेरावत ने कहा कि सेक्शन में बदलाव एक प्रक्रिया है और ये तो हर स्कूल में होता है। ये प्रबंधन का फैसला था और हम देख सकते हैं कि अब शांति, अनुशासन और लर्निंग एनवायरमेंट है। बच्चे कभी-कभी लड़ाई करते थे।

वहीं इसके अलावा उन्होंने अपने बेतुके तर्क में ये भी कहा कि बच्चे धर्म के बारे में नहीं जानते, लेकिन कई चीजों पर मनमुटाव होता था। कुछ बच्चे शाकाहारी हैं, इसलिए भी दूरियां है। हमें सभी शिक्षक और विद्यार्थी के हित में देखना होगा। आपको कोई कंफ्यूजन ना हो इसके लिए बता दूं कि MCD भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित है।

अब इस बात पर हंसा जाए या फिर दुखी हो, इस पर मैं अभी तक असमंजस में हूं, क्योंकि इंचार्ज साहब के तर्क एक पल को तो हंसा रहे हैं क्योंकि बच्चों के अंदर तो पेंसिल को लेकर भी मनमुटाव हो जाता है, एक 10 रुपये की बॉल के लिए बच्चे लड़ते हैं। तो क्या हम उनके खेलने पर पाबंदी लगा दें। लेकिन वहीं जब इन बच्चों का भविष्य सोचता हूं तो लगता है कि अभी से ये हाल है तो आगे जा कर इनमें से जरूर कुछ शंभूलाल निकलेंगे, कितने अखलाक बनेंगे और कुछ तो हो सकता है आतंकी भी बन जाए और अपने धर्म की हिफाजत के लिए बंदूकें उठा लें।

सोचना जरूर कि ये देश और हमारी शिक्षा किस दिशा में जा रही है। ऐसी शिक्षा जो लोगों में भेदभाव पैदा करें इसकी हमें जरूरत भी है या नहीं।

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