Wednesday , December 19 2018
Home > Women Talk > Must Read: बेबाकी से कहेंगे… इस तरह के बाप को डूब मरना चाहिए
brides-being-sold-at-a-price-between-50000-to-1-lakh-rupees
brides-being-sold-at-a-price-between-50000-to-1-lakh-rupees

Must Read: बेबाकी से कहेंगे… इस तरह के बाप को डूब मरना चाहिए

देश में एक नारा बहुत ही आम होकर आजकल फैल रहा है और जिसे सुनकर तो आपका मन अच्छा महसूस करेगा लेकिन उस नारे की सरेआम जिस तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही है उसके बारे में जानकर हर पढ़े-लिखे और देश के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करने वाले इंसान को शर्म आ जाएगी। जिस नारे की हम बात कर रहे हैं वो है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं। सिर्फ यही एक नहीं बल्कि इस तरह के और भी नारे हैं जो महिलाओं के लिए आमतौर पर इस देश में इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन क्या हो जब ये नारे सिर्फ नारे ही रह जाए। हकीकत में इनकी कुछ अहमियत ही न हो।

एक सबसे बड़ा मुद्दा जो महिलाओं के साथ है वो लड़कियों की जनसंख्या का है। जहां लड़कों के मुकाबले लड़कियों की जनसंख्या कम है और जहां अभी भी कुछ जगहों पर एक लड़के के पैदा होने पर तो जश्न मनाया जाता है लेकिन लड़की के पैदा होने पर मां को कोसा जाता है। लड़की को अगर मारा नहीं जाए तो बहुत मेहरबानी होती है।

लेकिन अभी भी जब इस दौर में महिलाएं पुरुषों के साथ हर तरह से आगे बढ़ रही है। देश की अर्थव्यवस्था से लेकर सैन्य बल में सहयोग दे रही है। अब उस चुल्हेे-चौके से आगे निकलकर लड़कियों ने हाथ में लैपटॉप थाम लिया है। ऐसे में भी देश के कुछ राज्यों में ये समस्या अभी भी बहुत भयावह है। अब चाहे इसे सरकार की अनदेखी कहे या फिर समाज का अंधापन.. अब चाहे वजह सरकार हो या समाज भुगतना तो महिलाओं को ही पड़ रहा है।

 

child-marraige

 

देश के एक बहुत बड़े राज्य राजस्थान में तो आलम ये हो गया है कि यहां पर अब कुंवारे लड़कों को शादी करने के लिए दुल्हन ही नहीं मिल रही हैं। अगर आपको याद हो तो हरियाणा के कई इलाकों के लड़के भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं।

लेकिन राजस्थान के युवाओं के पास एक विकल्प है कि वो 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक देकर आसानी से अपने लिए दुल्हन खरीद सकते हैं। ये चलन आजकल राजस्थान के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में काफी जोर पकड़े हुए हैं। इस करतूत से ये बात तो सामने आ गई कि अब पैसों से आप अपना जीवनसाथी भी चुन सकते हैं। राजस्थान में कोटा, बूंदी, झालावर और बारां जिले आते हैं जो इस काम में शामिल है।

हैरानी की बात तो ये है कि इन शादियों में भी दलाल होते हैं। इस तरह की शादियां दलालों के द्वारा ही तय करवाई जाती हैं। ये दलाल शादी के लायक ऐसे कुंवारों पर नजर रखते हैं, जिन्हें दुल्हन नहीं मिल रही हो। तभी ये दलाल लड़के के घरवालों को दुल्हन दिलवाने का वादा करते हैं और बदले में उनसे मोटी रकम वसूलते हैं। बिना किसी Risk के 50 हजार से 1 लाख रुपये में दुल्हन मिल जाती है और ऐसी शादियों में कुछ भी गैरकानूनी नहीं होता क्योंकि ये दोनों ही तरफ के घरवालों की मर्जी से होती है। ये बात एक दलाल का ही कहना है।

आपको बता दें कि ज्यादातर लड़कियां मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार से यहां पर लाई जाती है। लेकिन राजस्थान की भी दुल्हनें खरीदी जा सकती हैं। इन सब में जो सबसे चौंकाने वाली बात है तो वो ये है कि दुल्हनों को खरीदने वालों को भी इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता है। जिस रिश्ते को एक पाक नजरिए से देखा जाता था। जिस देश में शादी के रिश्ते को मर्यादा पुरुषोत्तम राम और सीता की जोड़ी के समान देखा जाता है, उसी देश के अंदर आज शादी के नाम पर दलाली हो रही है।

child-marraige

 

खरीदने वालों का तो ये तक कहना है कि उन्हें एक खुशहाल, शादीशुदा जिन्दगी चाहिए थी। तो जब उन्हें अपनी जाति में दुल्हन नहीं मिलती है तो वो 1-2 लाख रुपये में दुल्हन खरीद लेते हैं। ये तो ऐसी बात हो गई कि आपको एक कपड़ा लेना है और वो अगर आपको सस्ता नहीं मिल रहा है तो उसकी ज्यादा कीमत देकर उसे ले लो। कब तक हमारे देश में महिलाओं को एक वस्तु की तरह देखा जाएगा।

जब लोकल रिसर्च इस पूरे मुद्दे पर की गई तो पता चला कि दुल्हन नहीं मिल रही वो अलग समस्या है लेकिन अपनी जाति की नहीं मिल रही ये सबसे बड़ी समस्या है। एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी। लड़की पहले खुद ही मारो और उनकी आबादी कम करो और फिर उसके बाद नहीं मिलने पर खरीदों और वो भी अपनी जाति की। इसमें खरीदने वालों की जितनी गलती है उससे लाखों गुना ज्यादा गलती उन मां-बाप की है जो अपनी बच्ची का सौदा करते हैं। ज्यादातर दुल्हनें गरीब घरों से आती हैं। शायद ये लड़कियां अपने परिवार वालों पर बोझ बन जाती हैं, तभी तो उन्हें पैसे लेकर बेच दिया जाता है।

ऐसे में अगर कोई इस देश के लिए कुछ बोले तो खुद को देशभक्त कहने वाले चंद नेता, कार्यकर्ता और सोशल मीडिया पर ट्रोल आर्मी आपको गद्दार, देशद्रोही कह देगी। लेकिन इन अकल के अंधों को कौन समझाएं की हमारे देश को हमेशा से संबोधित एक महिला से ही किया गया है। हमने बचपन से जो नारा देशभक्ती के लिए सीखा है वो भारत माता की जय है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’… ‘सेल्फी विद डॉटर’ ये सब अब मानों एक सिर्फ चोंचलेबाजी नजर आती हैं और ये सिर्फ बड़े शहरों के लिए ही बने हैं।

 

इफ्तिखार आरिफ ने बहुत खूब कहा है कि –

“बेटियां बाप की आंखों में छुपे ख्वाब को पहचानती हैं

और कोई दूसरा इस ख्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं”

 

अब जरा सोचिए कि वही बाप अपनी बेटी की कीमत लगाकर अपनी गरीबी पर पर्दा करता है… फिर भी एक बेटी अपने पिता की खुशी के लिए खुद का सौदा होने देती है। बेबाकी से हम कहेंगे कि इस तरह के लोगों को शर्म से डूब मरना चाहिए।

 

ये भी पढ़ें

international-women-day-2018-women-are-fighting-for-their-rights

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: 70% महिलाओं को सेक्स या इससे जुड़े मामले तय करने का अधिकार नहीं

देश हो या दुनिया महिलाएं कहीं भी पुरुषों से कम नहीं हैं। अब महिलाएं हर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *