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महात्मा गांधी और मोदी

क्या महात्मा गांधी की वसीयत पर मोदी ने कर लिया है कब्जा?

मोहनदास करमचंद गांधी (Mahatma Gandhi) एक नाम नहीं बल्कि एक विचारधारा है, ये विचारधारा 150 साल की हो गई है। इस मौके पर एक अलग सी जंग नजर आई है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी उस औलाद की तरह पेश आ रहे हैं, जो बाप की संपत्ति पर अपना हक जता रहे हैं। महात्मा गांधी और मोदी का एक साथ नाम जुड़ने लगा है।

महात्मा गांधी की विचारधारा पर पहले तो कांग्रेस का कॉपीराइट (सर्वाधिकार) हुआ करता था, लेकिन अब इस पर BJP (मोदी) ने भी अपना दावा ठोक दिया है। साल 2014 से ही नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी के जन्मदिन को स्वच्छता अभियान के रूप में चलाते हैं।

गांधी की विचारधारा को 2 हिस्सों में बांट दिया गया है, एक तो वो है जो मानते हैं कि अहिंसा का मार्ग सही है और जो गांधीगिरी में विश्वास रखते हैं, लेकिन एक वर्ग ये भी है जो कहता है कि गांधी बंटवारे की वजह बने।

महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की विचारधारा थी कि अहिंसा, सत्य और ईमानदारी से सब कुछ जीता जा सकता है। इस पर हर साल 2 अक्टूबर के दिन मोटिवेशन के लिए शेर-ओ-शायरी व्हाट्सऐप पर आते हैं, जैसे कि “3 गोलियों से गांधी तो मर गए, लेकिन गांधीगिरी जिंदा रहेगी।” लेकिन ये मैसेज 3 अक्टूबर को एक कोने में दफन हो जाता है।

इस दिन पक्ष और विपक्ष दोनों ही गांधी के लिए एक सुर में बोलते हैं। लेकिन इस बार कांग्रेस और BJP दोनों ने अपने-अपने तरीके से गांधीगिरी की है। कांग्रेस तो खैर हर साल ही गांधी जयंती पर अलग कुछ करती है, क्योंकि वो उनका हक भी है। जैसे वीर सावरकर के लिए BJP का हक है। लेकिन लंबे वक्त से BJP ने कांग्रेस से उनका ये हक छीन लिया है।

भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को अपना बता रहे हैं, और राहुल गांधी और सोनिया गांधी के मन में आ रहा है कि सीटें भी ले लीं और अब गांधी भी ले रहे हैं। जिस वजह से उनकी फिक्र बढ़ गई है। दरअसल प्रधानमंत्री ने गांधी को हैक कर लिया है और इस वजह से कांग्रेस एकदम से बिना रीढ़ की हड्डी की हो गई है।

गांधी कांग्रेस पार्टी का गुरूर हैं, और लगातार BJP के जरिये उनके गुरूर को ही उनसे छीना जा रहा है। जिस वजह से अब कांग्रेस का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है, क्योंकि अगर BJP गांधीगिरी भी करने लगेगी तो कांग्रेस फिर क्या करेगी? सदन में तो संख्या है नहीं गांधी भी उनसे छिन रहे हैं।

महात्मा गांधी के जन्मदिन को हमेशा से कांग्रेस ही बड़े अवसर के रूप में मनाती आई है, लेकिन अब लगातार गांधी जयंती का स्तर नरेंद्र मोदी ऊंचा करते जा रहे हैं और हर साल ये एक भव्य इवेंट बनता जा रहा है। जो यकीनन कांग्रेस के गुरूर पर खतरा है।

अब अगर बात इन दोनों दलों के एक लॉजिक की करें तो गांधी के नाम पर कांग्रेस ने लगभग अपनी सारी योजनाएं शुरु की। लेकिन खुद गांधी के आदर्शों को नहीं समझें। वहीं BJP ने गांधी के जन्मदिन पर स्वच्छता, अहिंसा की बड़ी-बड़ी बातें तो की है, लेकिन हिंदू मुसलमान की एकता और मोब लिंचिंग पर खामोश है।

BJP ने अपनी सांसद प्रज्ञा ठाकुर पर कोई कार्रवाई नहीं की, जो गांधी के हत्यारे गोडसे को देशभक्त कहती है।

दरअसल गांधी एक ऐसी शख्सियत है, जिससे कोई प्रधानमंत्री खुद को अलग नहीं कर सकता है। वो एक वैश्विक नेता हैं, जिन्हें भारत से ज्यादा आज की तारीख में बाहर के मुल्कों में माना जाता है। यहां तक की पाकिस्तान में भी उनके पुतले लगे हैं।

जब हाउडी मोदी में गांधी और नेहरू की बात मोदी के सामने होती है, तो वो समझते हैं कि ये वो इन्वेस्टमेंट है जो कभी नहीं डूबेगा। जो रुख आजकल प्रधानमंत्री मोदी का गांधी के प्रति है, उसे देखकर तो कह सकते हैं कि वो बहुत जल्द ही कांग्रेस मुक्त भारत करने की तरफ जा रहे हैं।

 

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