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भारत में कानून कैसे बनता है?

हमारे देश में कानून को सबसे ज्यादा तवज्जो दी जाती है, संविधान से चलने वाले भारत में कानून से बढ़कर कुछ भी नहीं होता है, ना कोई व्यक्ति, ना कोई दल, ना कोई धर्म और ना कोई जाति। ऐसे में कानून बनता कैसे हैं ये जानना बहुत जरूरी होता है। अक्सर हम लोग सुनते हैं कि मताधिकार बहुत अहम होता है और इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

दरअसल जब हम अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं तो इससे हम एक उम्मीदवार चुनते हैं जो विधानसभा या फिर लोकसभा में हमारा पक्ष रखता है। विधानसभा के लिए जिसे हम चुनते हैं उसे विधायक और संसद में चुने हुए प्रत्याशी को सांसद के नाम से बुलाते हैं। ये दोनों ही हमारे मुद्दे सदन में रखते हैं।

इन्हीं सदनों में कानून बनाएं जाते हैं। विधायक विधानसभा में एक प्रदेश के लिए और सांसद संसद में पूरे देश के लिए कानून बनाते हैं, जिनके आधार पर देश चलता है, इसलिए कहा जाता है कि वोट देते वक्त जरूर सोच विचार करना चाहिए।

आज हम आपको अपने इस पोस्ट में यही बताएंगे की एक कानून कैसे बनता है और जो बिल सदन में पेश होता है वो कानून में कैसे बदलता है। हम आपको उदाहरण में संसद में जो बिल पास होकर कानून बनता है उसके माध्यम से समझाएंगे। संसद में एक बिल के कानून बनने की पूरी प्रक्रिया होती है। जो कि इंट्रोडक्शन से शुरू होकर राष्ट्रपति तक के पास जाता है। तो चलिए जानते हैं इस पूरी प्रक्रिया के बारे में –

सबसे पहले बिल को राज्यसभा में या फिर लोकसभा में सरकार की तरफ से पेश किया जाता है। जिसके बाद इसके पक्ष और विपक्ष में बहस होती है। जिससे इस बिल में क्या कमी है उसे ठीक किया जा सके।

इसके बाद बिल पास होने के लिए वोटिंग होती है जिसमें एक तय संख्या के हिसाब से आंकड़ा बनता है। ये सदन में मौजूद सदस्यों के आधार पर तय की जाती है। ऐसे में अगर सदन की संख्या पूरी है तो दो तिहाई की बहुमत की जरूरत पड़ती है तो वहीं अगर सदन में सांसद अनुपस्थित है या फिर वो वोट नहीं डालते हैं तो ऐसी स्थिति में 50 फीसदी का बहुमत आंकड़ा चाहिए होता है।

उदाहरण के रूप में अगर लोकसभा में 545 सदस्य है जिनमें से अगर 95 सांसद अनुपस्थित है या फिर वो वोट नहीं डालते हैं तो बहुमत का आंकड़ा 225 होगा क्योंकि कुल संख्या भी 450 सांसदों की हो जाती है। ऐसे में बिल पास होने के लिए 50 फीसदी सांसदों की ही जरूरत होगी। वहीं दूसरी तरफ अगर सदन में पूरे सदस्य मौजूद है तो दो तिहाई की बहुमत से बिल पास कराना होगा जिसके लिए 545 सदस्यों वाली लोकसभा में 340 मतों की जरूरत होगी।

एक बार वोट होने के बाद इनकी गिनती होती है अगर ऐसे में नतीजा बराबरी का निकलता है तो फिर सदन के प्रिसाइडिंग ऑफिसर यानी की सभापति या उपसभापति अपना वोट डालते हैं और इसके बाद नतीजा घोषित किया जाता है।

एक बिल को कानून में बदलने के लिए संसद के दोनों सदनों में पास होना जरूरी होता है। यानी की लोकसभा और राज्यसभा दोनों में अगर बिल पास होगा तभी वो कानून बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ता है नहीं तो वहीं से लौट जाता है।

जब एक बिल दोनों सदनों में पास हो जाता है तो फिर इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है और राष्ट्रपति की आखिरी अनुमति के बाद बिल कानून में परिवर्तित हो जाता है।

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