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वोटों की गिनती कैसे होती है? how are election votes counted in India

भारत में वोटों की गिनती कैसे होती है? जानिए पूरा प्रोसेस

वोटों की गिनती कैसे होती है, ये एक ऐसा सवाल है जो उस वक्त हर वोटर के दिमाग में आता है जब नतीजों का इंतजार किया जा रहा होता है। चाहे फिर लोकसभा चुनाव हो, विधानसभा या फिर कॉर्पोरेशन के हर चुनाव में वोटों कि गिनती कैसे होती है इसका एक ही प्रोसेस है।

हाल ही में लोकसभा चुनाव हुए उस वक्त आपके जहन में भी ये सवाल आ रहा होगा कि आखिर कैसे होती है वोटों की गिनती? कौन से लोग इसमें शामिल होते हैं? क्या कोई नया प्रोसेस तो नहीं अपनाया जा रहा है? तो ऐसे में अपने इस आर्टिकल में हम आपको इस बात की पूरी जानकारी मिलेगी कि हर चुनाव के बाद वोटों की गिनती कैसे होती है और इसका पूरा प्रोसेस क्या है?

वोटों की गिनती कैसे होती है?
Photo Source: thehindu.com

EVM मशीनों को रखा जाता है स्ट्रॉन्ग रूम में

सबसे पहले जैसे ही मतदान पूरा होता है तो सील बंद EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को काउंटिंग सेंटर में ले जाया जाता है, जहां पर उन्हें स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। इन स्ट्रॉन्ग रूम में पूरी सुरक्षा के साथ मतगणना के दिन तक EVM को रखा जाता है।

स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी तीन लेवल पर होती है, लेकिन मुख्य रूप से सुरक्षा केंद्रीय बलों के हाथ में होती है। स्पेशल फोर्स (SF), पुलिस और CRPF के जवानों का अंदर बाहर 24 घंटे पहरा होता है। इसके अलावा, EVM मशीनों को जहां रखा जाता है, उन कमरों में और सेंटर के बाहर CCTV से भी नीगरानी की जाती हैै।

कैसे होती है वोटों की गिनती ? जानिए 15 पॉइंट्स में

1- सबसे पहले सुबह 7 से 8 बजे तक काउंटिंग सेंटर के अंदर काउंटिंग एजेंट को एंट्री दी जाती है

2- सुबह 8 बजे काउंटिंग की शुरुआत होती है।

3- इलेक्शन ऑफिसर सबसे पहले डाक से आए मतों को चेक करते हैं। उसके बाद उसे पोस्टल बैलेट टेबल पर भेज देते हैं।

4- करीब आधे घंटे के बाद EVM से वोटों की गिनती शुरू होती है।

5- सबसे पहले स्ट्रॉन्ग रुम से EVM को काउंटिंग टेबल पर लाया जाता है

6- काउंटिंग के लिए 14 टेबल बनते हैं।

7- एक बार में ज्यादा से ज्यादा 14 EVM की गिनती होती है।

8- काउंटिंग सुपरवाइजर एजेंट्स की मदद से गिनती की शुरुआत करते हैं।

9- काउंटिंग सुपरवाइजर सबसे पहले EVM पर लगे सील्स की जांच करते हैं और तय करते हैं कि मशीन से छेड़छाड़ तो नहीं की गई है।

10- काउंटिंग सुपरवाइजर एजेंट्स को बताते हैं कि कैसे EVM के बटन दबाते हैं, जिसके बाद हर उम्मीदवार के वोटों की संख्या दिख जाती है। जैसे चुनाव अधिकारी रिजल्ट के बटन को दबाता है उसे हर उम्मीवार को पड़े वोट की संख्या दिख जाती है।

11- काउंटिंग स्टाफ हर उम्मीवार को पड़े वोट की संख्या लिखकर रिटर्निंग ऑफिसर को भेज देता है।

12- जैसे ही एक राउंड की काउंटिग पूरी होती है काउंटिंग स्टाफ सारी जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को दे देते हैं जिसके बाद पहले राउंड के नतीजों का ऐलान किया जाता है।

13- खास बात ये है कि EVM की काउंटिंग का आखिरी राउंड डाक मतों की गिनती पूरी होने के बाद ही किया जाता है।

14- हर राउंड के नतीजे की जानकारी चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर को दी जाती है। इनका दफ्तर ही ये जानकारी इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के वेबसाइट सर्वर पर फीड करता है।

15- काउंटिंग की ये प्रक्रिया चलती रहती है जब तक काउंटिंग पूरी नहीं हो जाती है।

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