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भारत में कैसे बनती है सरकार how government is formed in India difference between cabinet and council of ministers

भारत में कैसे बनती है सरकार, क्या होता है मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद में अंतर?

भारत में कैसे बनती है सरकार, क्या होता है मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद में अंतर? केंद्र सरकार कैसे बनती है, भारत में कैसे बनती है नई सरकार आदि ऐसे सवाल अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं।

लोकसभा चुनाव 2019 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी और NDA ने शानदार जीत दर्ज की और इसके बाद 30 मई को सरकार बनाई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नरेंद्र मोदी को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। इसके अलावा 57 और नेताओं को राष्ट्रपति ने शपथ दिलाई है। इसमें बीजेपी के अलावा शिवसेना, अकाली दल, एलजेपी जैसे सहयोगी दलों के मंत्री भी रहे हैं।

शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी को लोकसभा में सरकार का बहुमत साबित करना होगा। वहीं देश की संसदीय प्रणाली के कुछ बुनियादी सवाल हैं जिसे आम लोग जानते तो हैं लेकिन समझ नहीं पाते हैं। तो आज हम आपको बहुत आसान भाषा में समझाने जा रहे हैं कि मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद में क्या अंतर होता है, एक नई सरकार के गठन की प्रक्रिया क्या होती है, कितने लोग एक सरकार में मंत्री बन सकते हैं, कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री में क्या अंतर होता है।

भारत में कैसे बनती है सरकार (How government is formed in India)

543 सीटों वाली लोकसभा में आम चुनावों के बाद जो राजनीतिक दल या गठबंधन बहुमत का आंकड़ा हासिल करता है वो सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है। भारत की लोकसभा में बहुमत हासिल करने के लिए 272 सासंदों की जरूरत होती है।

बहुमत का आंकड़ा जुटाने के बाद संसदीय दल का नेता चुना जाता है। एक पार्टी या गठबंधन के सभी सांसदों की सहमति से संसदीय दल के नेता को चुना जाता है। जिसके बाद संसदीय दल का नेता राष्ट्रपति से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करता है।

ऐसा होने के बाद राष्ट्रपति संसदीय दल के नेता को सरकार बनाने का न्योता देता है और शपथ ग्रहण का कार्यक्रम आयोजन करते हैं। प्रधानमंत्री अपने साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों की लिस्ट भी राष्ट्रपति को शपथ ग्रहण से पहले देते हैं। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के साथ मंत्रिपरिषद को भी शपथ दिलाते हैं जिसमें कैबिनेट मंत्री भी शामिल होते हैं जिनको मंत्रिमंडल भी कहा जाता है।

इसके बाद नई सरकार का शपथ ग्रहण होता है। लेकिन राष्ट्रपति उसके बाद संसद का सत्र बुलाते हैं जिसमें प्रधानमंत्री को लोकसभा में बहुमत साबित करना होता है। बहुमत साबित करने के बाद नई सरकार की गठन की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरु हो जाती है।

मंत्री परिषद में सभी मंत्री आते हैं, जिन्होंने शपथ ली थी। मंत्री परिषद में कैबिनेट के अलावा स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और राज्यमंत्री भी आते हैं। संविधान के अनुच्छेद 74 में मंत्री परिषद के गठन के बारे में उल्लेख किया गया है जबकि अनुच्छेद 75 मंत्रियों की नियुक्ति, उनके कार्यकाल, जिम्मेदारी, शपथ, योग्यता और मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते से संबंधित है।

मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद में अंतर
(Difference between cabinet and council of ministers)

आपके आसानी के लिए हम ऐसे समझे कि मंत्रीमंडल एक छोटा ग्रुप होता है और मंत्री परिषद बड़ा ग्रुप होता है। लेकिन इन दोनों में सबसे ज्यादा शक्ति मंत्रीमंडल के पास होती है। हालांकि ‘मंत्रीमंडल’ ‘मंत्री परिषद’ के अंदर ही आता है।

कैबिनेट मंत्री को ही मंत्रीमंडल कहा जाता है। मंत्री परिषद में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, स्वतंत्र राज्य मंत्री और उप मंत्री सभी आते हैं। इन सभी को जो मिलाकर बनता है उसे ही मंत्री परिषद कहा जाता है।

कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और उप मंत्री में अंतर

सरकार में कई मंत्रालय होते हैं। अंतर समझने के लिए मंत्रालय को (1) बड़े मंत्रालय और (2) छोटे मंत्रालय दो हिस्से में बांटते हैं।

छोटे मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री आते हैं। लेकिन अगर कोई (1) बड़ा मंत्रालय है यानि अगर एक कैबिनेट मंत्री नहीं चला सकता तो उसे विभागों में बांट देते हैं। अब इन विभागों का जो प्रमुख होता है उसे राज्य मंत्री कहते हैं। राज्य मंत्री को कैबिनेट मंत्री के सहयोग के लिए बनाया जाता है।

अब सवाल है कि राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार क्या होते हैं? इनको राज्यमंत्री का ही दर्जा मिला होता है लेकिन इनके मंत्रालय में कोई कैबिनेट मंत्री नहीं होता है। इसलिए इसे स्वतंत्र प्रभार कहते हैं। छोटे मंत्रालय (2) के लिए स्वतंत्र प्रभार बनाए जाते हैं। स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री ही अपने मंत्रालय के प्रमुख होते हैं। जबकि राज्य मंत्री का मुखिया कैबिनेट मंत्री होता है और उनकी कैबिनेट के प्रति जिम्मेदारी होती है।।

उपमंत्री क्या है? उपमंत्री कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री दोनों की सहायता करती है। उपमंत्री मंत्रिमंडल के किसी विभाग का काम निपटाने में मदद करता है। मंत्रिमंडल यानि कैबिनेट की बैठक में उसकी कोई भागीदारी नहीं होती है। यह जरूर नहीं कि हमेशा उपमंत्री बनया जाए लेकिन अगर विभाग बड़ा हो तो उपमंत्री बनाया जाता है। हालांकि भारत में उपमंत्री का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। केवल कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री ही मुख्य होते हैं।

कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री और राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के काम

भारत सरकार के मंत्री परिषद में मुख्य रूप से तीन तरह के मंत्री होते हैं। कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और राज्यमंत्री। राज्यमंत्री को जूनियर मिनिस्टर भी कहा जाता है।

1- कैबिनेट मंत्री- मंत्रिमंडल का हिस्सा कैबिनेट मंत्रियों के पास एक या उसे आवंटित सारे मंत्रालय की पूरी जिम्मेदारी होती है। सरकार के सभी फैसलों में कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। सरकार कोई भी फैसला, अध्यादेश, नया कानून, कानून संसोधन वगैरह कैबिनेट की बैठक से ही पास करती है।

2- राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार)- स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों के पास आवंटित मंत्रालय और विभाग की पूरी जवाबदेही होती है लेकिन वो आम तौर पर कैबिनेट की बैठक में शामिल नहीं हो सकते हैं। कैबिनेट इनको उनके मंत्रालय या विभाग से संबंधित मसलों पर चर्चा और फैसलों के लिए खास मौकों पर बुला सकती है।

3- राज्य मंत्री- ये कैबिनेट मंत्री के नीचे काम करने वाले मंत्री हैं। एक कैबिनेट मंत्री के नीचे एक या उससे ज्यादा राज्य मंत्री भी हो सकते हैं। एक मंत्रालय के अंदर कई विभाग होते हैं जो राज्य मंत्रियों के बीच बांटे जाते हैं ताकि वो कैबिनेट मंत्री को मंत्रालय चलाने में मदद कर सकें।

सरकार में मंत्री कौन बनता है ?

मंत्री संसद के किसी भी सदन यानी लोकसभा या राज्यसभा से चुने जा सकते हैं। दिलचस्प बात ये है कि भारत में मंत्री बनने के लिए जरूरी नहीं है कि वह व्यक्ति लोकसभा या राज्य सभा का सदस्य हो। किसी ऐसे व्यक्ति को भी प्रधानमंत्री द्वारा मंत्री बनाया जा सकता है, जो किसी भी सदन का सदस्य नहीं है। लेकिन ऐसे व्यक्ति को 6 महीने के अंदर किसी न किसी सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होगी।

उदाहरण के लिए अरुण जेटली ने 2014 लोकसभा चुनाव में पहली बार अमृतसर सीट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह से बुरी तरह हार गए। लेकिन 2014 के मोदी सरकार में इन्हें केंद्रिय वित्त मंत्री बनाया गया क्योंकि भले ही लोकसभा चुनाव हार गए हो लेकिन वे राज्यसभा के सदस्य थे।

भारत सरकार में कितने मंत्री बन सकते हैं

भारत में केंद्र सरकार के मंत्री परिषद की संख्या लोकसभा के सांसदों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है। लोकसभा में 543 सांसद होते हैं और इसके तहत 15 फीसदी का मतलब होता है 81 यानि की किसी भी सरकार में 81 से ज्यादा (मंत्री परिषद सब मिलाकर) मंत्री नहीं हो सकते हैं।

कैबिनेट मीटिंग कौन करता है?

कैबिनेट मीटिंग में प्रधानमंत्री भी शामिल होते हैं। मंत्रिमंडल के मंत्री यानि कैबिनेट मंत्री मंत्रिमंडल बैठक (कैबिनेट मीटिंग) में भाग लेते हैं, जबकि राज्य मंत्री या उपमंत्री इसकी बैठक में भाग नहीं ले सकते। ये कैबिनेट मंत्री के सहायक के रूप में होते हैं। स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री भी कैबिनेट मीटिंग में भाग नहीं लेते लेकिन यदि उसके विभाग से संबंधित किसी बात पर चर्चा कैबिनेट की बैठक में होने वाली हो तो वह बैठक में हिस्सा ले सकते हैं या उन्हें बुलाया जा सकता है।

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