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शराब से राज्यों की कमाई कैसे होती है

शराब से राज्यों की कमाई कैसे होती है?

देश में लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद है। लेकिन तीसरे लॉकडाउन में सरकार ने शराब बिक्री शुरु कर दी है। लॉकडाउन में शराब बिक्री को छूट क्यों मिली? ऐसे में सवाल ये है कि सरकार के लिए शराब बेचना इतना जरूरी क्यों है? दरअसल इसके पीछे का कारण राज्यों की कमाई से जुड़ा हुआ है। वो कमाई जिसकी इस वक्त सरकारों को सबसे ज्यादा जरूरत है। लेकिन शराब से राज्यों की कमाई कैसे होती है?

दरअसल लॉकडाउन की वजह से पूरे देश में आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगी हुई है। इसकी वजह से केंद्र और राज्यों को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में शराब की बिक्री को इजाजत मिलना राज्यों के लिए राजस्व के लिहाज से अच्छा कदम है। शराब बिक्री किसी भी राज्य के लिए राजस्व का बहुत महत्त्वपूर्ण और बड़ा जरिया होता है।

शराब से राज्यों की कमाई कैसे होती है?

सामान्य रूप से राज्य शराब की मैन्युफैक्चरिंग और सेल पर एक्साइज ड्यूटी लगाते हैं। लेकिन तमिलनाडु जैसे राज्य एक्साइज ड्यूटी के अलावा VAT भी चार्ज करते हैं। कई राज्यों में इम्पोर्टेड विदेशी शराब पर स्पेशल फीस, ट्रांसपोर्ट फीस और लेबल-ब्रांड रजिस्ट्रेशन चार्ज भी लगाया जाता है।

2019 में RBI ने ‘State Finances: A Study of Budgets of 2019-20’ नाम की एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। इसमें राज्यों के राजस्व के बारे में जानकारी दी गई थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर राज्यों के अपने राजस्व का 10-15% अल्कोहल पर एक्साइज ड्यूटी से आता है। ये हिस्सा काफी बड़ा है।

यहां तक कि सेल्स टैक्स (जो कि अब GST है) के बाद राज्यों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया अल्कोहल पर एक्साइज ड्यूटी है। इसलिए राज्य शराब को GST के दायरे से बाहर रखना चाहते हैं। शराब से राज्यों की कमाई कैसे होती है, इसके लिए आपको एक्साइज ड्यूटी को भी समझना होगा।

एक्साइज ड्यूटी से कितनी कमाई करते हैं राज्य?

RBI की रिपोर्ट का कहना है कि 2019-20 में सभी 29 राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेशों ने शराब पर एक्साइज ड्यूटी से होने वाली कमाई का बजट 1.75 करोड़ से ज्यादा का रखा था। ये बजट 2018-19 में हुई 1,50,657.95 करोड़ की कमाई से 16% ज्यादा था।

रिपोर्ट के आंकड़ों से अगर अनुमान लगाया जाए तो पता चलता है कि 2018-19 में औसतन राज्यों ने एक महीने में 12,500 करोड़ एक्साइज ड्यूटी से कमाए। 2019-20 में ये कमाई 15,000 करोड़ तक पहुंच गई।

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