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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: 70% महिलाओं को सेक्स या इससे जुड़े मामले तय करने का अधिकार नहीं

देश हो या दुनिया महिलाएं कहीं भी पुरुषों से कम नहीं हैं। अब महिलाएं हर फिल्ड में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। 8 मार्च को पूरी दुनिया में ‘इंटरनेशनल वूमेन्स डे’ यानी हिन्दी में बोले तो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। खैर हम अपने देश भारत की बात करेंगे।

 

कुछ लोग ‘इंटरनेशनल वूमेन डे’ को ‘हैप्पी वूमेन डे’ के तौर पर भी विश करते हैं। खैर हमें कोई ऐतराज नहीं हैं, सेलिब्रेट कीजिए। लेकिन अगर आप इंडियन हैं तो ये बात भी जरूर जान लीजिए।

 

भारत में महिलाएं अपने न्यूनतम या कहे बेसिक अधिकारों को हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही है। इस बात का खुलासा खुद सरकार की रिपोर्ट में किया गया है। हैल्थ मिनिस्ट्री के तहत नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 में चिंता और चौंकाने वाले इससे जुड़े तथ्य सामने आए हैं।

 

70 प्रतिशत महिलाओं को सेक्स या इससे जुड़े मामले तय करने का अधिकार नहीं है।
55 प्रतिशत महिलाओं को अपने कमाए धन में से कुछ भी खर्च करने का हक नहीं है।
52 प्रतिशत महिलाएं अपने पति से मार खाती हैं और वे इसे सही भी मानती हैं।
48 प्रतिशत माहिलाओं को अपने मन के काम करने का अधिकार नहीं है।

 

कहां हैं महिला अधिकार

सर्वे के अनुसार देश की महिलाओं को न अपने शरीर पर पूरा अधिकार है, न अपने धन पर और न ही अपने मन पर है। मतलब महिलाएं कब और कैसे सेक्स करें, यह तय करने का मामला हो या अपने ही कमाए पैसे को खर्च करने की बात हो या किससे बात करें या कहां जाएं, यह तय करने का मुद्दा हो, इन सभी मामलों में अधिकतर महिलाओं को अपने हिसाब से कुछ भी करने का अधिकार नहीं है।

 

महिलाएं इस सच को मानती हैं, पतियों का मारना ठीक

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) का सबसे हैरान करने वाला सच यह है कि महिलाएं इस सच को मान बैठी हैं कि पतियों का उन्हें मारना-पीटना ठीक है। खुद पुरुष भी यह मानते हैं कि ऐसा करना उनका अधिकार है। 52 फीसदी महिलाओं ने कहा कि वह पति की मार खाती हैं तो 42 फीसदी पुरुष मानते हैं कि वह अपनी पत्नी को पीटते हैं। पत्नी को पीटने के पीछे दो सबसे बड़ी वजह है, ससुराल के लोगों की बातों को न मानना और सेक्स के लिए इनकार करना। रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर चौथी महिला घरेलू हिंसा की शिकार हो रही है।

 

13 साल से पहले करना पड़ता है सेक्स

सर्वे के अनुसार अभी भी लगभग हर दूसरी लड़की की शादी 18 साल से पहले हो रही है, जबकि परिवार की जिद के कारण 10 प्रतिशत लड़कियों को 13 साल की उम्र में शादी कर जबरन सेक्स करना पड़ता है। रिपोर्ट के अनुसार पहली बार सेक्स करने की औसत उम्र महिलाओं में 19.1 है। पिछले कुछ सालों में इस मोर्चे पर थोड़ा सुधार हुआ है लेकिन अभी भी हालत बहुत चिंताजनक है। शादी में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को सेक्स या अपने शरीर से किसी तरह का अधिकार नहीं है और उन्हें अपने पति या परिवार की बात सुननी पड़ती है।

 

अजनबी से बात न करना और  अपने मन की न सुनना

अधिकतर महिलाओं ने माना है कि उन्हें अपने मन मुताबिक कोई काम करने का अधिकार नहीं है। न ही वह अपने पति के अलावा किसी दूसरे पुरुष से बात कर सकती है और न ही घर से अकेले निकल सकती है। सर्वे के अनुसार हर दूसरी औरत को अपनी पसंद के अनुसार दूसरे पुरुष से बात करने का अधिकार नहीं है। 48 फीसदी महिलाओं ने माना कि उनके व्यवहार पर उनके पतियों का नियंत्रण है। 59 फीसदी महिलाओं ने कहा कि उन्हें घर से अकेले निकलने का अधिकार नहीं है।

 

अपने ही कमाए धन पर अधिकार नहीं

रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर महिलाओं को अपने ही कमाए धन पर अधिकार नहीं मिलता। 55 फीसदी महिलाओं ने माना कि उन्हें अपने ही कमाए पैसे का खर्च करने या इस पर हक जताने का अधिकार नहीं है। पहले यह 52 फीसदी था। यह बहुत हैरान करने वाला ट्रेंड है कि विकास के साथ इस मोर्चे पर महिलाओं की स्थिति और कमजोर ही हुई है।

 

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