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Kathua Asifa rape Tiranga march

आसिफा से हैवानियत करने वाले आरोपियों की खातिर तिरंगे को बदनाम करने वाले गुनहगार तुम भी हो!

सिनेमाघर में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजता है। मेरे पैर खुद-ब-खुद खड़े हो जाते हैं। राष्ट्रगान को सुनते हुए उसे दोहराता हूं। सामने स्क्रीन पर लहराता तिरंगा देखकर गर्व महसूस करने के अलावा कुछ ऐसा महसूस करता हूं जिसे मैं शब्दों से बयां नहीं कर सकता। मुझे बहुत अच्छा लगता है। एक संतुष्टि मिलती है, क्योंकि बचपन से ही राष्ट्रगान सुनता आ रहा हूं, तिरंगा देखता आ रहा हूं।

जब मैं कनॉट प्लेस (दिल्ली) में लहराते हुए तिरंगे को देखता हूं तो मेरे मुंह से अपने आप ‘मेरी जान तिरंगा है, मेरी आन तिरंगा है’ गाने के बोल निकल जाते हैं। जब कोई जवान शहीद होता है तो उसे तिरंगे में लपेटा जाता है। उस दृश्य को देखकर गर्व महसूस करता हूं कि उसने देश के लिए जान दी और उसे तिरंगा नसीब हुआ। साथ ही दुखी होता हूं कि उसका परिवार अकेला पड़ गया, बूढ़े मां-बाप ने बेटा खो दिया, पत्नी अपने जीवनसाथी को खोकर विधवा हो गई, छोटे बच्चे बिना बाप के हो गए। गांव में जब उस शहीद की लाश आई तो गांव के ज्यादातर लोगों ने तिरंगे में लपेटे शव को देखकर सम्मान दिया।

Kathua Asifa rape Tiranga march

मेरा एक दोस्त जो BSF में है, कहता है कि तिरंगा हर किसी को नसीब नहीं होता। मैं कहता हूं सही बात है। लेकिन जिस तरह कुछ सालों से तिरंगे के साथ घिनौना खेल खेला जा रहा है वो बहुत दुखद है। अरे इसी तिरंगे की शान के लिए कितनों ने जान दी ताकि हमारा तिरंगा शान के साथ लहराता रहे। लेकिन अब ‘हिन्दुत्व’ की तरह ‘तिरंगा झंडा’ भी विवादित बनता जा रहा है। ‘हिंन्दुत्व’ और ‘तिरंगा झंडा’ दोनों ही सही हैं लेकिन चंद हिन्दुत्व और देशभक्ति के कॉपीराइट वाले ठेकेदारों ने विवादित बना दिया है। इतना विवादित कि पढ़े लिखे हिन्दू ‘हिन्दुत्व’ से कटने लगे हैं, वे नहीं जानना चाहते हैं कि हिन्दू धर्म क्या है। इसलिए इन ठेकेदारों और उन्हें फॉलो करने वाले को दुनिया का सबसे बड़ा मूर्ख कहना गलत नहीं होगा।

यही खेल तिरंगे के साथ हो रहा है। राजनीतिक लाभ के लिए तिरंगा रैली निकाली जाती है। किसी खास समूह को खुश करने के लिए मरने के बाद किसी को भी तिरंगे में लपेट दिया जाता है। कोई भी तिरंगा उठाकर चल दे रहा है और बन जा रहा है कथित देशभक्त। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची आसिफा से 8 लोगों ने बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी। इन 8 आरोपियों में तीसरा आरोपी स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजुरिया है, जिसने बच्ची को मारने से पहले एक बार रेप करने की इच्छा जाहिर की थी।

इस घटना को मुस्लिम और हिन्दू की तराजू में नहीं तौलना चाहिए। क्योंकि आसिफा जैसी न जाने कितनी बच्चियां ऐसी बलि चढ़ चुकी हैं। यहां बात रेप करने वालों के पक्ष में खड़े होने की है। जिस तरह ‘अल्लाह-ओ-अकबर’ कहकर निर्दोषों की हत्या करने वाले आतंकवादी को एक सच्चा मुसलमान नहीं कहा जा सकता है। उसी तरह रेप करने वाले को और ‘जय श्री राम’ या ‘भारत माता की जय’ बोलकर आरोपियों के पक्ष में तिरंगे के साथ खड़े होने वाले को सच्चा हिन्दू या देशभक्त कतई नहीं कहा जा सकता है। आरोपियों के पक्ष में सिर्फ इसलिए रैली निकालना कि सभी आरोपी हिन्दू हैं ये नीच और असभ्य मानसिकता को दर्शाता है। ये लोग हमारे समाज से ही आते हैं, फिर भी मन सवाल पूछता है कि कहां से आते हैं ये लोग?

जिस तिरंगे को इतना सम्मान दिया जाता है उसे इन लोगों ने 8 साल की बच्ची से रेप कर हत्या करने वाले आरोपी के लिए इस्तेमाल किया। क्या इस घृणित काम के लिए तिरंगा उठाते हुए इनके हाथ नहीं कांपे? तिरंगा किसी से बैर नहीं करता किसी से भेदभाव नहीं करता सबका सम्मान करता है। पहले इस तिरंगे को उठाने लायक बनो फिर तिरंगा मार्च निकालो। उस अहसास को महसूस करो जब कारगील में जीत के बाद सैनिकों ने तिरंगा फहराया था और अब जब 71 देशों के बीच गोल्ड कोस्ट में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम में देश के लिए गोल्ड जीतने के बाद खिलाड़ियों ने तिरंगा उठाया तब उनके चेहरे पर क्या रौनक थी।

CWC2018

तिरंगे पर अशोक चक्र की सभी 24 तीलियां जीवन को दर्शाती हैं जिसमें प्रेम, बहादुरी, धैर्य, शांति, उदारता, अच्छाई, भरोसा, सौम्यता, नि:स्वार्थ भाव, आत्म-नियंत्रण, आत्म बलिदान, सच्चाई, नेकी, न्याय, दया, आकर्षणशीलता, नम्रता, हमदर्दी, संवेदना, धार्मिक ज्ञान, नैतिक मूल्य, धार्मिक समझ, भगवान का डर और उम्मीद शामिल हैं। क्या ये सब जानते हुए इन्होंने आरोपियों के पक्ष में तिरंगा उठाया?

तिरंगा देश में अलग-अलग विचारधारा और धर्म होने पर भी ये सभी धर्मों को एक राह पर ले जाता है जो हमारे लिए एकता का प्रतीक है। इसका इस तरह अपमान मत करो कि ये तिरंगा ‘भारत माता की जय’ बोलकर सिर्फ भीड़ उकसाने के लिए, किसी समूह को पीटने के लिए एक हथियार बन जाए और लोग तिरंगे से भी नफरत करने लगें। कहीं, ऐसा दिन न आ जाए कि शहीद सैनिक का परिवार शव को तिरंगे में लपेटने से मना कर दें और आप फिर भी भारत माता की जय कहते रहें।

नोट- यह पोस्ट विबेक दुबे ने हमारे प्लेटफॉर्म पर लिखा है और पेशे से ये एक पत्रकार हैं। यदि आप भी कुछ लिखना चाहते हैं तो फेसबुक पर मैसेज में या theindianclick@gmail.com पर हमें मेल भेज सकते हैं।

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