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प्राचीन काल में अजब-गजब आविष्कार के बारे में जानकर आपको भारत पर होगा गर्व

भारत ने टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी काफी हद तक विकास कर लिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं… कि हमारे देश ने हजारों साल पहले यानी कि प्राचीन काल में ही ज्ञान-विज्ञान (Science) के क्षेत्र में काफी तरक्की कर ली थी।

 

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अक्सर हम किताबों में पढ़ते आए हैं कि चरक (Charaka) और सुश्रुत (Sushruta) ने बहुत पहले ही प्लास्टिक सर्जरी की तकनीक विकसित कर ली थी। इसके अलावा,  श्रीधराचार्य (Sridharacharya) का सूत्र जिसे हम पाइथागोरस थ्योरम  कहते है, इसे बहुत पहले श्रीधराचार्य ने सिद्ध कर दिया था।

 

क्या आपको पता है जगदीश चंद्र बोस (Jagdish Chandra Bose) ने बहुत पहले ही बेतार संचार (Wireless communication) की खोज कर ली थी। जिसे बाद में मार्कोनी (Guglielmo Marconi) ने लेकर रेडियो का आविष्कार किया। आज हम आपको प्राचीन भारत में हुए उन आविष्कारों के बारे में बतायेंगे जिसे जानकर आपको अपने देश पर गर्व होगा।

 

क्या आप जानते हैं, प्राचीन समय में विमानों की टेक्नोलॉजी आज से भी ज्यादा विकसित थी। महर्षि भारद्वाज (Maharshi Bharadwaj) ने सर्वस्व नामक ग्रन्थ लिखा था। इसमें तमाम तरह के यंत्रों के बनाने और उन्हें चलाने के बारे में विस्तार से बताया गया है। वैज्ञानिक डॉ. वामनराव काटेक की `अगस्त्य संहिता’ पर रिसर्च के मुताबिक पुष्पक विमान को अगस्त्य मुनि (Agastya Muni) ने बनाया था।

 

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ऋग्वेद (Rigveda) के चौथे मंडल के 25वें और 26वें सूत्र में तीन चक्कों वाले ऐसे हवाई जहाज का जिक्र किया गया है, जो अंतरिक्ष में भी जा सकता था। कैप्टन आनंद जे बोडास (Captain Anand J Bodas) की रिसर्च के मुताबिक उन दिनों के विमान आज के विमानों की तुलना में काफी बड़े होते थे। सिर्फ यही नहीं वे दाएं-बाएं घूमने के अलावा पीछे की ओर भी आसानी से उड़ सकते थे।

 

शून्य और दशमलव- (0 .)

आप जानकर हैरान होंगे कि ग्वालियर के एक मंदिर की दीवार पर हिंदी में 270 का अंक लिखा हुआ है। यह दुनिया में ‘0’ का सबसे पुराना लिखित दस्तावेज है। माना जाता है कि 0 का प्रयोग वैदिक काल से शुरू हुआ था। सन 498 में भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट (Aryabhata) ने शून्य और दशमलव. मेथड का आविष्कार किया। आर्यभट्ट ने कहा था- ‘स्थानं स्थानं दसा गुणम्’… इसका मतलब दस गुना करने के लिए उसके आगे जीरो लगाओ। इसी से दशमलव थ्योरी की शुरुआत हुई।

 

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प्रेग्नेंसी, कैटरेक्ट, बॉडी पार्ट ट्रांसप्लांट, पथरी का इलाज और प्लास्टिक सर्जरी जैसी कई चिकित्सा सम्बन्धी जानकारी-

सुश्रुत (Sushruta) को पहला सर्जन माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि आज से 3000 साल पहले सुश्रुत युद्ध में घायल लोगों का इलाज करते थे। सुश्रुत ने 1000 साल पहले ही प्रेग्नेंसी, पथरी का इलाज, बॉडी पार्ट ट्रांसप्लांट और प्लास्टिक सर्जरी जैसी कई ट्रीटमेंट सम्बन्धी जानकारी बता दी थी।

 

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ऐसे माना जाता है कि रामायण और महाभारत से पहले ही भारत में पहिया का अविष्कार किया जा चुका था। इसका इस्तेमाल रथों और बैलगाड़ियों में किया जाता था। सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों में भी खिलौना, हाथीगाड़ी, पहिया आदि चीजे मिली थी।

 

सबसे पहले भाषा का शुद्ध व्याकरण (Grammer) में रचना पाणिनी (Panini) ने की थी। लगभग 500 ईसा पूर्व पाणिनी ने संस्कृत भाषा को व्याकरण के नियमों से लोगों को समझाने का प्रयास किया। उनकी पुस्तक का नाम अष्टाध्यायी (अष्टाध्यायी = आठ अध्यायों वाली) है, जिसमें 8 अध्याय और 4 हजार सूत्र है।

 

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बौधायन (Baudhayana) भारत के प्राचीन गणितज्ञ में से एक थे। उन्होंने ही रेखगणित (Geometry) और ज्यामिति और त्रिकोणमिति (Trigonometry) के महत्वपूर्ण नियम लिखे।

 

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