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lost leg at the age of 17 years

17 साल की उम्र में खो बैठी थी अपना एक पैर, फिर भी नहीं छोड़ा डांस का साथ…

52 साल की एक्ट्रेस सुधा चंद्रन के बारे में आपने जरूर सुना होगा। बड़े से लेेकर छोटे परदे तक उनका नाम चलता है। सुधा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत तेलुगू फिल्म ‘मयूरी’ से की थी जो कि उनकी लाइफ के एक इंसिडेंट से इंस्पायर थी। जिसके बाद में इस फिल्म का हिंदी रीमेक ‘नाचे मयूरी’ भी रिलीज किया गया था।

इस फिल्म के जरिये सुधा ने अपने उन लम्हों को फिर से जीया जिसकी वजह से उनकी जिंदगी बदल गई थी। 17 साल की उम्र में सुधा का एक सड़क हादसा हुआ था जिसके बाद उनका पैर काटना पड़ा था। ये बात बहुत कम लोग ही जानते हैं कि सुधा चंद्रन का एक पैर नकली है। लेकिन उनके मन में लगन ऐसी थी कि वो आज भी अपने एक नकली पैर के साथ ही नाचती है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि सुधा ने 3 साल की उम्र से ही भरतनाट्यम सीखना शुरू कर दिया था औऱ वो रोज सुबह स्कूल जाती स्कूल के बाद वो डांस क्लास जाती और रात तक घर वापस लौटती। डांस के साथ-साथ सुधा पढ़ने में भी अच्छी थी और 10वीं में सुधा ने 80 फीसदी नंबर्स के साथ क्लास में टॉप किया था, अपने डांस के लिए प्यार की वजह से उन्होंने आगे की पढ़ाई आर्ट्स में की थी।

एक बार सुधा चंद्रन बस से जा रही थी और उस बस का एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में उनके पैर को काफी नुकसान हुआ और पैर में फ्रैक्चर हुआ और साथ ही कुछ घाव भी थे। जिस पर डॉक्टर ने पट्टी कर दी थी लेकिन कुछ वक्त बाद उस घाव में गैंगरीन हो गया था, जिसके चलते उनके पैर का पंजा ही कटना पड़ गया था। उस वक्त सुधा की उम्र सिर्फ 17 साल थी।

लेकिन पंजा कटने के बाद भी सुधा ने हार नहीं मानी और उन्होंने अपने डांस को जिंदा रखा। इस पूरे हादसे के बाद सुधा ने 4 महीनों में चलना सीखा। इसके कुछ समय बाद सुधा ने फिर से डांस करना शुरू किया और फिर वो दिन आया जब उन्हें सेंट जेवियर्स में परफॉर्म करने का मौका मिला। हालांकि परफॉर्मेंस से पहले वो बहुत ज्यादा डरी हुई थीं। लेकिन उनका डांस इतना शानदार रहा कि उनके सम्मान में अधिकतर लोग खड़े हो गए थे।

अपनी परफॉर्मेंस करने के बाद जब सुधा स्टेज के पीछे गई तो उनके पिता ने पैर छूते हुए कहा कि मैं सरस्वती के पैर छू रहा हूं, तुमने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। वो वक्त ही सुधा की लाइफ का टर्निंग प्वाइंट बन गया था।

Sudha-ChandranA

आपको बता दें कि सुधा 90 के दौर में छोटे पर्दे से जुड़ी थी। उन्होंने ‘नागिन’ के अलावा ‘बहुरानियां’, ‘हमारी बहू तुलसी’, ‘चंद्रकांता’, ‘जाने भी दो पारो’, ‘चश्मे बद्दूर’, ‘अंतराल’, ‘कैसे कहूं’, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, ‘कस्तूरी’, ‘अदालत’ और ‘शास्त्री सिस्टर’ जैसे सीरियल्स में काम किया है।

इतना ही नहीं सुधा ने फिल्म ‘नाचे मयूरी’, ‘शोला और शबनम’, ‘हम आपके दिल में रहते हैं’, ‘शादी करके फंस गया यार’, ‘मालामाल वीकली’ के साथ-साथ तेलुगू, तमिल, मलयालम, भोजपुरी, मराठी, गुजराती और कन्नड़ भाषा में भी काम किया है। आपको बता दें कि सुधा जल्द ही ट्राइबल कम्युनिटी बेस्ड फिल्म ‘क्रीना’ में भी नजर आने वाली हैं।

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