Wednesday , December 19 2018
Home > Featured > मिर्जा गालिब के ये शेर जो आपको भी इश्क करने पर मजबूर कर देंगे…
mirza ghalib romantic poetry

मिर्जा गालिब के ये शेर जो आपको भी इश्क करने पर मजबूर कर देंगे…

आज के इस नए दौर में हम इश्क का जश्न मनाने हैं। लेकिन असल इश्क क्या होता है तो ये शायरों ने बहुत पहले ही लिख दिया था। वो कहते हैं न शायरी सीखनी है तो इश्क कर लो.. खुद-ब-खुद इश्क अच्छे खासे इंसान को शायर बना देता है। इसी की एक मिसाल थे उर्दू के मशहूर शायर मिर्जा गालिब। गालिब (Mirza Ghalib) ने इश्क को लेकर ऐसी शायरी कही है जो न सिर्फ आम जिंदगी में बस गई है बल्कि बॉलीवुड से लेकर टेलीविजन तक इसका खूब इस्तेमाल होता आया है।

 

मिर्जा गालिब की इश्किया शायरी का इस्तेमाल तो हर प्यार करने वाले ने अपनी जिंदगी में कभी न कभी जरूर किया होगा। मिर्जा गालिब के लिए कहा जाता है कि वो अपनी असल जिंदगी में भी बहुत प्यारी शख्सियत थे। वो मस्त रहते थे और अपनी ही दुनिया में मशगूल रहने वाले शख्स थे।

 

बॉलीवुड और टीवी पर उनके ऊपर ज्यादा काम नहीं हुआ है। बॉलीवुड में फिल्म ‘मिर्जा गालिब (1954)’ यादगार थी और टेलीविजन पर गुलजार का बनाया टीवी सीरियल ‘मिर्जा गालिब (1988)’ सबको याद आता है। फिल्म में जहां भारत भूषण लीड रोल में नजर आए थे तो टीवी पर नसीरूद्दीन शाह ने मिर्जा गालिब का किरदार निभाया। लेकिन अगर कहें कि मिर्जा गालिब के शेर पढ़कर आपको भी इश्क हो जाएगा तो ये गलत नहीं होगा। अगर आप ये शेर अपने महबूब को सुना दें तो यकीनन उन्हें आपसे और भी ज्यादा प्यार हो जाएगा।

 

“इश्क ने ‘गालिब’ निकम्मा कर दिया

वर्ना हम भी आदमी थे काम के”

 

“उन के देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक

वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है”

 

“इश्क पर जोर नहीं है ये वो आतिश ‘गालिब’

कि लगाए न लगे और बुझाए न बने”

 

“आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक

कौन जीता है तिरी जुल्फ के सर होते तक”

 

“हम तो फनाह हो गए उसकी आंखें देख कर ‘गालिब’

न जानें वो आईना कैसे देखते होंगे”

 

“तुम सलामत रहो हजार बरस

हर बरस के हों दिन पचास हजार”

 

“मोहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का

उसी को देख कर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले”

 

“ये न थी हमारी किस्मत कि विसाल-ए-यार होता

अगर और जीते रहते यही इंतिजार होता”

 

“दिल से तेरी निगाह जिगर में उतर गई,

दोनों को इक अदा में रजा-मंद कर गई”

 

“दिया है दिल अगर उस को बशर है क्या कहिए
हुआ रकीब तो हो नामा-बर है क्या कहिए”

 

“तू ने कसम मय-कशी की खाई है ‘गालिब’
तेरी कसम का कुछ ए’तिबार नहीं है”

 

ये भी पढ़ें

male sexual issues

अगर पुरुष करते हैं ये चीजें तो इन्हें तुरंत कर दें बंद, मर्दानगी के लिए हैं खतरा…

आजकल के लाइफस्टाइल में और जिस तरह से सब लोग गलत खाने पीने की आदतों …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *