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Mob thrashes 68-year-old Muslim man for allegedly selling beef, forces him to eat pork, असम: गोमांस बेचने के शक में भीड़ ने मुस्लिम बुजुर्ग को सड़क पर पीटा, जबरन खिलाया सुअर का मीट

गोमांस बेचने के शक में भीड़ ने बुजुर्ग मुस्लिम को सड़क पर पीटा, जबरन खिलाया सुअर का मीट!

देश में धर्म विशेष के खिलाफ बढ़ती नफरत का एक और मामला सामने आया है। एक बुजुर्ग मुस्लिम असम (Assam) में हिंसा का शिकार हुआ है जिसकी पहचान शौकत अली (Shaukat Ali) के रूप में हुई है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ ने 68 साल के शौकत अली पर गोमांस बेचने का आरोप लगाया और बेरहमी से पिटाई की। उन्होंने न सिर्फ पिटाई की बल्कि सुअर का मीट खाने के लिए मजबूर किया। यह घटना 7 अप्रैल को असम के बिश्वनाथ चाराली (Biswanath Chariali) शहर में हुई थी।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में, गुस्से में भीड़ से घिरे हुए शौकत अली (Shaukat Ali) को घुटने के बल देखा जा सकता है। भीड़ शौकत अली से पूछती है कि वह गोमांस क्यों बेच रहा है और क्या उसके पास ऐसा करने का लाइसेंस है।

गुस्साई भीड़ ने शौकत अली से अपनी राष्ट्रीयता बताने के लिए कहा और पूछा कि क्या वह बांग्लादेशी है या उसके पास राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) प्रमाण पत्र है।

पहले भी सुर्खियां बटोर चुकी हैं ये मामले-

ऐसी घटना पहली बार नहीं है। साल 2015 में नोएडा के दादरी में गोमांस रखने के आरोप में भीड़ ने अखलाक की हत्या कर दी थी। साल 2017 में दिल्ली से शामली जा रही ट्रेन में कुछ युवकों ने एक मौलवी और साथी रिश्तेदारों के साथ मारपीट की थी, क्योंकि युवकों को मुस्लिम के टोपी पहनने से ऐतराज था।

साल 2017 में ही राजस्थान के अलवर जिले में 10 नवंबर को उमर खान की अज्ञात आरोपियों ने हत्या की दी थी। उमर की हत्या का आरोप कथित गोरक्षकों पर लगा था। उसी साल अप्रैल में राजस्थान के बहरोड़ में कथित गोरक्षकों ने पीट-पीटकर पहलू खान की हत्या कर दी थी।

यही सिलसिला 2018 में जारी रहा। साल 2019 में मार्च महीने में हरियाणा के गुरुग्राम में कुछ दबंगों ने एक मुस्लिम परिवार के साथ सरेआम मारपीट की थी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गया था। वीडियो में कुछ युवक लाठी डंडों से बेरहमी से 2 युवकों को मार रहे थे, और उस दौरान परिवार की एक महिला उन गुंडों से रहम की भीख मांग रही थी।

अब एक महीने बाद ही अप्रैल 2019 में असम से मामला सामने आया है। स्थानीय पुलिस के अनुसार, “शौकत अली (Shaukat Ali) एक व्यापारी है और पिछले 35 सालों से इलाके में भोजनालय चला रहा है। भीड़ ने उस पर बाजार में गोमांस बेचने का आरोप लगाया। हालांकि, स्थिति खराब हो गई जब बदमाशों ने शौकत अली की पिटाई शुरू कर दी और उसे कथित रूप से सुअर का मांस खाने के लिए मजबूर किया।”

घटना के एक अन्य वीडियो में, भीड़ को शौकत अली (Shaukat Ali)  को मारते हुए देखा जा सकता है और एक पैकेट से उसे मीट खाने के लिए मजबूर किया जा रहा है जो कथित सुअर का मांस है।

शौकत अली को चोटें आईं और उनका स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। भीड़ ने बाजार के प्रबंधक कमल थापा के साथ भी दुर्व्यवहार किया।

स्थानीय पुलिस ने इस घटना की पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया कि एक कमल थापा और दूसरी शौकत अली (Shaukat Ali) के रिश्तेदारों द्वारा अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दो FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस ने हालांकि इस बात से इनकार किया कि हिंसा धर्म विशेष के खिलाफ थी।

AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर इस घटना को लेकर लिखा, “मैं कई लोगों को जानता हूं जो महसूस करते हैं कि पिछले पांच सालों में लिंचिंग की संख्या के कारण वे निराश हैं। प्रत्येक वीडियो मुझे परेशान करता है और मुझे दुखी करता है।”

ओवैसी ने आगे ये भी कहा कि “यह बेतुका है कि असम में गोमांस वैध है  और भारत के हर हिस्से में एक निर्दोष बूढ़े व्यक्ति को पीटना अवैध है।”

क्या है असम में कानून?

आपको बता दें कि असम में बीजेपी की सरकार है और वहां गोमांस पर बैन नहीं है। राज्य में पशुवध असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 1950 (Assam Cattle Preservation Act, 1950) के दायरे में आता है। कानून के अनुसार, राज्य पशु चिकित्सक से “फिट-फॉर-स्लॉटर” सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद केवल 15 साल से अधिक उम्र के मवेशियों का वध किया जा सकता है।”

बीजेपी के खाने के दांत और दिखाने के कुछ और-

साथ में बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हाल ही में 2019 लोकसभा चुनाव के लिए मेनिफेस्टो जारी किया है। मेनिफेस्टो में 38 नंबर पेज पर समावेशी विकास की बात कही गई है।

इसमें अल्पसंख्यक वर्ग के लिए लिखा गया है कि “सबका साथ-सबका विकास के संकल्प पर हम सभी अल्पसंख्यक (मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी) के सशक्तिकरण हेतु और उन्हें गरिमापूर्ण विकास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

लेकिन जो मामलें आ रहे हैं वो साबित करते हैं कि फर्जी हिंदू संगठनों और कथित हिंदूओं पर नकेल ना कस के उन्हें खुली छूट दी जा रही है। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 से जुलाई 2018 तक कुल मिलाकर गोरक्षा के नाम पर 85 गुंडागर्दी के मामले सामने आए थे जिनमें 34 लोग मरे गए और 289 लोगों को अधमरा कर दिया गया।

By- Vibek Dubey

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