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BLOG: मोदी मिशन 2019 की राह हुई मुश्किल, एकजुट हो रही हैं पार्टियाँ

कहते हैं ज़िन्दगी में अनुभव बहुत कुछ सिखाता है, और वो अनुभव हमेशा आपको याद रहता है जो आपसे सरोकार रखता हो। फिर चाहे वो निजी ज़िंदगी से जुड़ा हुआ हो, दफ़्तर में की हुई ग़लतियों से सीखने की बात हो या फिर राजनीतिक गतिविधियों से मेल खाते नतीज़े हो, जिनसे अनुभव लेती आ रही है हमारे देश की राजनैतिक पार्टियाँ।

हाल ही में आये उत्तरप्रदेश और बिहार के लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों के नतीजों से देश की सबसे बड़ी पार्टी BJP ने हार का स्वाद काफ़ी अरसे बाद चखा। उत्तरप्रदेश में लोकसभा की दो सीटों पर उपचुनाव हुए थे, गोरखपुर और फूलपुर की इन सीटों पर 14 मार्च को परिणाम घोषित किये गए, जहाँ बुआ और बबुआ का जादू देखने को मिला, SP और BSP के गठबंधन ने BJP को औंधे मुँह गिरा दिया और उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा,  SP और BSP के इस गठबंधन से दोनों पार्टियां जीत का ख़ूब जश्न मना रही है।

फूलपुर सीट से समाजवादी पार्टी के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने BJP के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 59,460 मतों के बड़े अंतर से हराकर फूलपुर लोकसभा उपचुनाव जीता,  SP उम्मीदवार नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल को 3,42,922 वोट मिले तो वही BJP के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 2,83,462 मत प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर की बहुप्रतीक्षित सीट पर भी SP के प्रवीण निषाद ने BJP के उपेन्द्र शुक्ला को 21 881 वोटों से शिकस्त दी और 27 साल से गोरखपुर सीट पर BJP के किले को SP ने ढहाया है।

BJP इस संसदीय सीट पर 1991 से लगातार जीतती आ रही थी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पाँच बार गोरखपुर से सांसद रहे हैं। लेकिन इस बार BJP को जीत का जश्न मनाने का मौका नहीं मिल पाया है। इस उपचुनाव के नतीजों की कई तरह से राजनीतिक व्याख्याएं की जा सकतीं हैं- कुछ लोग मुद्दों को ज़िम्मेदार ठहराएंगे जबकि कुछ लोग ब्राह्मण-ठाकुर वाले जातीय समीकरण का भी हवाला दे सकते हैं। अब सभी बड़े नेता हार की समीक्षा करने में जुटे हुए हैं।

ठीक ऐसा ही हाल बिहार की लोकसभा की अररिया सीट पर हुआ, अररिया लोकसभा सीट पर भी RJD के सरफराज आलम ने BJP प्रत्याशी प्रदीप कुमार सिंह को 61,788 वोटों से पराजित किया। और जहानाबाद विस उपचुनाव में RJD प्रत्याशी सुदय यादव करीब 35 हजार वोटों से जीत दर्ज की है, तो BJP ने भभुआ सीट पर जीत हासिल की है। यहां से BJP प्रत्याशी रिंकी पांडे जीती।

जीत के बाद SP के नवनिर्वाचित सांसदों ने कहा कि केंद्र में और राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी लोगों को बेवकूफ़ बनाना बंद करे और जनकल्याण पर ध्यान दे, भगवा पार्टी 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रचण्ड बहुमत आने की बात कह रही है, और मिशन 350 को लेकर आगे बढ़ रही है लेकिन यूपी और बिहार के नतीजों ने इन दावों को थोड़ा कमज़ोर किया है।

विपक्षी पार्टियां हो रही है एकजूट

इस हार से पहले BJP राजस्थान में भी लोकसभा की तीन सीटों पर कांग्रेस के हाँथो पराजित हो चुकी है। और मध्यप्रदेश के रतलाम में भी हार का मुंह देखना पड़ा था जो की भविष्य के लिए ख़तरे के संकेत हैं। लगातार हार का सामना कर रही BJP के ख़िलाफ़ अब देश की अन्य विपक्षी पार्टियों ने एकजुट होने का फैसला किया है,  SP, BSP, कांग्रेस और अन्य छोटी बड़ी पार्टियाँ 2019 के चुनाव में BJP को उसके मिशन में कामयाब होने नहीं देना चाहतीं है।

मोदी मैजिक को 2019 में BJP ज़रूर इस्तेमाल करना चाहेगी लेकिन क्या 2014 के चुनावी वादों को मोदी सरकार निभा पाई है, क्या देश की सवा सौ करोड़ की जनसंख्या इस सरकार के काम से ख़ुश है? क्या मौजूदा समय ही देश के अच्छे दिन है? स्थिती ये बनी हुई है की दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को सीलिंग की समस्या से लाठीयाँ खानी पड़ रही है और आप महिलाओं को सशक्त करने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ महाराष्ट्र में किसानों को अपने हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए गाँवों से निकल शहरों तक नंगे पाँव कुंच करनी पडी है और राजनैतिक पार्टियाँ इन्हें ही कम्युनिस्टों से स्पोंसर्ड फौज़ बता रही हैं।

सरकार अपनी सफलताओं को जनता के बीच ज़रूर गिनवती है लेकिन उन विफलताओं पर ध्यान नहीं देती जो समाज के उस हर वर्ग से जुड़ीं है जिनकी ये समस्याएं हैं जो इन परिस्थितियों और परेशानियों से जूझ रहे हैं। देश के युवाओं को माननीय प्रधानमंत्री जी स्टार्टअप की ओर आगे बढ़ा रहे हैं, मुद्रा योजना से लोन की सुविधा दे रहे हैं पर क्या ये युवा वो काम सही ढंग से कर पा रहा है। GST से उनकी कमर वैसे ही टूट गयी है। युवाओं से रोज़गार की बात सरकार चुनावी माहौल में खूब करती है, लेकिन उसके बाद प्रशासन को इनकी कोई सुध नहीं है।

SSC के पेपर रद्द व लीक मामले में इन युवाओं को धरनों में बैठना पड़ रहा है,  त्यौहार के इस वक़्त में युवाओं को जंतर मंतर पर बैठना पड़ रहा है।  नारे लागए जा रहे हैं – युवाओं की हुंकार SSC में भ्रष्टाचार, ऐसे गंभीर विषयों पर आपको CBI जांच के आदेश देने में इतना समय लगता है। ये वही युवा हैं मोदी जी जिनके बारे में जाकर आप विदेशों में अपने देश को सबसे युवा देश बताते हैं।

जब तक नीतियों और योजनाओं को धरातल पर नहीं उतारा जाएगा तब तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सैकड़ों योजनाएं, रोज़गार गरंटी योजना सिर्फ़ फ़ाइलों तक ही सीमित हो कर रह जायेगी। जागिये प्रभु जागिये नहीं तो ऐसे ही नतीज़े भविष्य में भी आपको देखने को मिलेंगे और साहब चौकिएगा बिल्कुल भी नहीं क्योंकि कांग्रेस ने तो आपके हिसाब से 70 सालों में कुछ किया ही नहीं लेकिन आपके 5 साल भी इसी में ना गिने जाने लगे इसका ख्याल रखियेगा।

आदमी को कॉन्फिडेंट होना चाहिए ओवर कॉन्फिडेंट नहीं, नहीं तो इसने तो अच्छे अच्छों को डुबो दिया। बहरहाल बात अनुभव से शुरू हुई थी तो यूपी और बिहार के इन परिणामों से BJP ने बहुत कुछ सीखा होगा, चलिए नए राजनीतिक समीकरण लगाइए ताकि भविष्य में आप जनता की सेवा कर सकें।

नोट: इस ब्लॉग को  Vinay Rawat ने हमारे प्लेटफॉर्म पर लिखा है और पेशे से ये एक पत्रकार हैं।  यदि आप भी कुछ लिखना चाहते हैं तो फेसबुक पर मैसेज में या theindianclick@gmail.com पर हमें मेल भेज सकते हैं।

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