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दिल्ली हत्याकांड : बेटी के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने पर पिता की हत्या molest girl murder father in moti nagar delhi

दिल्ली हत्याकांड: बेटी के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने पर पिता की हत्या

11 मई की रात जब एक लड़की अपने पिता के साथ दवाई लेने गई थी, उसने कभी नहीं सोचा था कि वो आखिरी बार पिता के साथ स्कूटर पर सफर कर रही है। लड़की के पिता ने अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए आवाज उठाई और बदले में मिली मौत। दिल्ली हत्याकांड के बाद एक बार फिर से देश की राजधानी दिल्ली में सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

दिल्ली हत्याकांड: बेटी से छेड़छाड़ का विरोध करने पर पिता को मिली मौत

दिल्ली में हुई घटना

ये घटना दिल्ली में चुनाव से एक दिन पहले हुई, मोती नगर के पास बसई दारापुर इलाके में गलियां इतनी संकरी है कि अगर एक रेहड़ी या फिर दो-तीन लोग खड़े हो जाएं तो एक स्कूटर या बाइक तक नहीं निकल सकती।

ऐसा ही कुछ हुआ था 11 मई की रात को जब इस इलाके में रहने वाले एक कारोबारी अपनी बेटी को अस्पताल से लेकर वापिस घर लौट रहे थे। आधी रात के करीब का वक्त था, बेटी को माइग्रेन का दर्द हुआ था और वो उसे अस्पताल लेकर गए थे।

लौटते वक्त एक गली में कुछ लड़के खड़े होकर बातें कर रहे थे। पिता ने उन लोगों को रास्ता देने के लिए कहा और हॉर्न बजाया। जो उन लड़कों को पसंद नहीं आया और उनके बीच में बहस शुरु हो गई। लड़कों ने रास्ता नहीं दिया और उनकी बेटी पर भद्दे कमेंट भी किए। किसी तरह से पिता वहां से निकले और अगली गली में अपने घर पहुंचे।

बेटी पर किए कमेंट चुभ रहे थे

वो घर तो पहुंचे थे लेकिन अपनी बेटी के लिए कही भद्दी बातें चुभ रही थी। अगले ही पल वो घर से निकले और वापस उन लड़कों के घर पर शिकायत करने के लिए पहुंचे। अश्लील कमेंट करने वाले लड़के एक ही भाई हैं और वो उन्हीं की गली में किराए पर रहते हैं।

पिता ने उन लड़कों के मां-बाप से शिकायत की लेकिन गलती मानने की जगह झगड़ा शुरू हो गया और उन लड़कों और उनके पिता ने मारपीट शुरू कर दी। ये झगड़ा इतना बढ़ गया कि उन लोगों ने चाकू से हमला कर दिया और जो पिता अपनी बेटी की इज्जत के लिए आया था, वो अपनी जान गंवा बैठा।

पिता और बेटा

बेटे पर भी किया हमला

जब काफी देर तक पिता नहीं लौटे, तो बेटी ने, मां और भाई को रास्ते में हुई कहासुनी के बारे में बताया। भाई ढूंढते हुए निकला तो पिता घायल हालत में मिले और उसने पिता को बचाने की कोशिश की तो लड़कों ने उस पर भी चाकू से वार किए। अगली सुबह पिता की अस्पताल में मौत हो गई और भाई जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।

इस घटना के बाद से ही पत्नी सदमे हैं, उनकी पहले से ही तबीयत खराब चल रही थी। जिस लड़की पर कमेंट किए गए वो बड़ी बेटी है और एमएनसी में नौकरी करती है और छोटी बेटी भी नौकरी करती है और बेटा कॉलेज में पढ़ रहा है।

अगले दिन रविवार को ही पुलिस ने 4 लोगों को पकड़ लिया, उनमें से दो नाबालिग हैं तो उन्हें बाल सुधार गृह भेजा गया है। वहीं बाप और एक लड़के को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। जबकि आरोपियों के किराए के घर में ताला लगा है और मां और बहन गायब हैं। पीड़ित के परिवार ने FIR में मां पर चाकू देने का आरोप लगाया है लेकिन पुलिस का कहना है कि फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है। आरोपियों पर हत्या, हत्या की कोशिश और महिला से बदतमीजी वाली धाराएं लगाई गई हैं और मामला दर्ज किया गया है।

खामोश रहे लोग

इस परिवार को जितनी शिकायत अपराधियों से है उतनी ही वहां के आसपास के लोगों से भी है, जो पूरी घटना को देखते रहे लेकिन पिता और बेटे को बचाने की कोशिश नहीं की। परिवार वालों का कहना है कि वो लोग मार रहे थे और सब तमाशा देख रहे थे। किसी ने उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की। उनके परिवार की औरतों ने भी मारा। पूरा परिवार लड़ने आया, लेकिन किसी की आवाज नहीं निकली।

इस पूरे मामले में लड़की खुद को दोषी मान रही है कि उसकी वजह से आज उसके पिता की जान गई है।

दिल्ली हत्याकांड को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद इस पर राजनीति शुरू हो गई है। दरअसल, जिनकी हत्या हुई वो हिन्दू धर्म के हैं और जिन्होंने हत्या की वो मुसलमान थे। इसलिए बीजेपी ने ट्वीट किया कि

“देश विदेश के हर मुद्दे पर ट्वीट करने वाले सीएम केजरीवाल, दिल्ली में हुई इतनी बड़ी घटना पर अभी तक चुप हैं। क्या वोट बैंक की राजनीति बोलने नहीं दे रही मुख्यमंत्री जी? ये साफ दर्शाता है कि आरोपी का धर्म देखकर ही आप कुछ बोलते हैं। हत्यारों से इतनी हमदर्दी क्यों?”

इसी तरह कुछ अन्य ट्वीट भी चले जिनमें अभियुक्तों के नाम लिखकर धार्मिक पहचान पर खासा जोर दिया गया है। हालांकि, परिवार और मोहल्ले के लोगों ने किसी भी तरह के सांप्रदायिक टकराव होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि ये एक झगड़ा है जो धर्म से अलग किसी के भी साथ हो सकता था।

अस्पताल ले जाने वाला भी मुसलमान था

परिवार वालों ने बताया कि उन लोगों से हमारी कोई रंजिश नहीं थी। पहले कभी झगड़ा नहीं हुआ। इसमें धर्म से जुड़ा कोई मसला नहीं है क्योंकि पिता और बेटे को अस्पताल ले जाने वाला भी एक मुसलमान लड़का ही है। वो हमारे परिवार जैसा है और यहां हिंदू और मुसलमान लंबे समय से साथ में रह रहे हैं। आसपास के लोग भी इस बात से सहमति जताते हैं कि अभी तक इस इलाके में धर्म के चलते झगड़ा नहीं हुआ। सब मिल जुलकर रहते हैं।

इस मामले के चश्मदीद और पीड़ितों को अस्पताल ले जाने वाले रियाज अहमद ने बताया कि रोजे की वजह से हमारा परिवार सहरी के लिए जगा हुआ था। तभी हमें औरतों के चीखने की आवाज सुनाई दी, मैं भागकर गया तो अंकल और उनके बेटे को चाकू मार दिया गया था। चाकू मारने वाले ने बेटी के बाल पकड़े थे और उसके चेहरे पर पत्थर मारने वाला था। मैंने सबसे पहले लड़की को छुड़ाया और उन्होंने मुझे भी पत्थर मारने की कोशिश की। फिर मैं किसी तरह अंकल और बेटे को अस्पताल ले गया।

दिल्ली हत्याकांड में बाहरियों का मसला

इतना ही नहीं इस घटना के बाद इलाके में बाहरियों और मूल निवासियों का मसला भी उठने लगा है। यहां पर कई लोगों ने मकान किराए पर दिए हुए हैं। दिल्ली हत्याकांड के बाद लोगों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से यहां के हालात बदल गए हैं। लोग किराए पर तो मकान दे देते हैं लेकिन पुलिस से किरायेदारों का वेरिफिकेशन नहीं कराते हैं।

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