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Mother’s Day: मां पर मुनव्वर राना के दिल छू लेने वाले 25 शेर

12 मई को मदर्स डे है, ऐसा माना जाता है या लोग कहते हैं। लेकिन कोई अपनी मां के लिए एक दिन कैसे तय कर सकता है। क्योंकि मां तो हर दिन की, हर घंटे की है, पूरे जीवन की है। उसने तब से हमें पाला है, जब इस दुनिया में हमारी आंख भी नहीं खुली थी।

मां पर किसने क्या नहीं लिखा। किसी ने पूरी दुनिया लिख डाली। उर्दू गजल में मां पर सबसे ज्यादा किसी ने लिखा है तो मुनव्वर राना ने लिखा है। उनसे पहले तक गजल में सबकुछ था।  महबूब,  हुस्न, तरक्कीपसंद अदब और बगावत सबकुछ पर मां नहीं थी। इसलिए उन्होंने एक बार कहा भी था कि

“मामूली एक कलम से कहां तक घसीट लाए
हम इस गजल को कोठे से मां तक घसीट लाए”

Happy Mother’s Day

तो चलिए अब पढ़िए, मां के रिश्ते पर मुनव्वर राना की कलम से सबसे बेहतरीन शेर-

1-

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है

माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है

2-

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू

मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना

3-

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती

बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती

4-

जब तक रहा हूँ धूप में चादर बना रहा

मैं अपनी माँ का आखिरी ज़ेवर बना रहा

5-

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई

मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई

6-

ऐ अँधेरे! देख ले मुँह तेरा काला हो गया

माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया

7-

दावर-ए-हश्र तुझे मेरी इबादत की कसम

ये मेरा नाम-ए-आमाल इज़ाफी होगा

नेकियां गिनने की नौबत ही नहीं आएगी

मैंने जो मां पर लिक्खा है, वही काफी होगा

8-

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ

माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ

9-

हादसों की गर्द से ख़ुद को बचाने के लिए

माँ ! हम अपने साथ बस तेरी दुआ ले जायेंगे

10-

ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे

माँ तुझे हम अभी बूढ़ा नहीं होने देंगे

11-

जब भी देखा मेरे किरदार पे धब्बा कोई

देर तक बैठ के तन्हाई में रोया कोई

12-

यहीं रहूँगा कहीं उम्र भर न जाउँगा

ज़मीन माँ है इसे छोड़ कर न जाऊँगा

13-

अभी ज़िन्दा है माँ मेरी मुझे कु्छ भी नहीं होगा

मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

14-

कुछ नहीं होगा तो आँचल में छुपा लेगी मुझे

माँ कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी

15-

दुआएँ माँ की पहुँचाने को मीलों मील जाती हैं

कि जब परदेस जाने के लिए बेटा निकलता है

16-

दिया है माँ ने मुझे दूध भी वज़ू करके

महाज़े-जंग से मैं लौट कर न जाऊँगा

17-

बहन का प्यार माँ की ममता दो चीखती आँखें

यही तोहफ़े थे वो जिनको मैं अक्सर याद करता था

18-

बरबाद कर दिया हमें परदेस ने मगर

माँ सबसे कह रही है कि बेटा मज़े में है

19-

खाने की चीज़ें माँ ने जो भेजी हैं गाँव से

बासी भी हो गई हैं तो लज़्ज़त वही रही

20-

माँ के आगे यूँ कभी खुल कर नहीं रोना

जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती

21-

मुझे कढ़े हुए तकिये की क्या ज़रूरत है

किसी का हाथ अभी मेरे सर के नीचे है

22-

बुज़ुर्गों का मेरे दिल से अभी तक डर नहीं जाता

कि जब तक जागती रहती है माँ मैं घर नहीं जाता

23-

ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता,

मैं जब तक घर न लौटूं, मेरी माँ सज़दे में रहती है

24-

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है

मां दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है

25-

चलती फिरती आँखों से अज़ाँ देखी है

मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है

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