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कोरोना काल में गरीब और गरीब हो गया : Oxfam

कोरोना महामारी की वजह से पूरा देश रुक गया है, अर्थव्यवस्था जाम हो गई है, तामाम कोशिशें की जा रही हैं कि अब इससे बाहर निकला जा सके। वैज्ञानिकों ने वैक्सीन बनाई है, जिसके बाद माना जा रहा है कि अब शायद इस महामारी का खात्मा होगा। लेकिन कोरोना वायरस का खात्मा तो वैक्सीन से हो जाएगा, लेकिन एक वारस और है जो दशकों से राज कर रहा है। वो है असमानता का वायरस। इसी असमानता के बारे में एक रिपोर्ट नॉन-प्रॉफिट ग्रुप Oxfam लेकर आया है, जिसका नाम है इनइक्वालिटी वायरस (The Inequality Virus)

कोरोना महामारी किसी के लिए विपदा, किसी के लिए काल लेकर आई, तो दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जिनके लिए ये कमाई लेकर आई। अगर कहें तो इस महामारी में गरीब और गरीब हो गया है और अमीर ज्यादा अमीर हो गया है। कोविड-19 महामारी ने दुनिया में इनकम में असमानता को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। इस असमानता का असर शिक्षा, स्वास्थ्य और एक अच्छे लाइफस्टाइल पर बहुत ज्यादा पड़ेगा।

इनइक्वालिटी वायरस (The Inequality Virus)

Oxfam की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में दिसंबर तक अरबपतियों की संपत्तियों में 3.9 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। दुनिया के टॉप 10 अरबपतियों की संपत्ति में 540 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ इसी दौरान महामारी के चलते करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए है और ना जाने कितने लोग भुखमरी की कगार पर आ गए है। इस रिपोर्ट में अनुमान जाहिर किया गया है कि महामारी के दौरान कम से कम 200 मिलियन से 500 मिलियन लोग गरीब हो गए हैं।

रिपोर्ट ने कहा है कि महामारी के दौरान ऐसे लोगों की तादाद भी बढ़ी हो जो अब गरीबी से बस एक पायदान दूर रह गए हैं। ये रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में जो लोग 2 डॉलर से 10 डॉलर की रोजाना कमाई करते हैं, अगर एक दिन उनकी ये कमाई न हो तो वो गरीबी के स्तर पर आ जाएंगे।

अरबपतियों की संपत्ति 35 प्रतिशत बढ़ी : Oxfam

लॉकडाउन के दौरान भारतीय अरबपतियों की संपत्ति 35 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि इस दौरान करोड़ों लोगों के लिए आजीविका का संकट पैदा हो गया।

हर आदमी को मिल सकते हैं 94,045 रुपये

मार्च 2020 के बाद की अवधि में भारत में 100 अरबपतियों की संपत्ति में 12,97,822 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। इतनी राशि का वितरण अगर देश के 13.8 करोड़ सबसे गरीब लोगों में किया जाए, तो इनमें से हर एक को 94,045 रुपये दिए जा सकते हैं। भारत के 11 प्रमुख अरबपतियों की आय में महामारी के दौरान जितनी बढ़ोतरी हुई है, उससे मनरेगा और स्वास्थ्य मंत्रालय को 10 साल तक मौजूदा बजट मिल सकता है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश अंबानी को एक घंटे में जितनी आमदनी हुई है, उतनी कमाई करने में एक अकुशल मजदूर को दस हजार साल लग जाएंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश अंबानी, गौतम अडाणी, शिव नादर, सायरस पूनावाला, उदय कोटक, अजीम प्रेमजी, सुनील मित्तल, राधाकृष्ण दमानी, कुमार मंगलम बिरला और लक्ष्मी मित्तल जैसे अरबपतियों की संपत्ति मार्च 2020 के बाद महामारी और लॉकडाउन के दौरान तेजी से बढ़ी है। तो वहीं अप्रैल 2020 में प्रति घंटे 1.7 लाख लोग बेरोजगार हो रहे थे।

Oxfam रिपोर्ट कहती है शिक्षा क्षेत्र में भी बढ़ी असमानता

Oxfam ने महामारी के चलते भारत में गरीब बच्चों के सामने स्कूली शिक्षा को लेकर पैदा हुई चुनौतियों का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल शिक्षा के लिए सिर्फ 4 फीसदी ग्रामीण परिवारों के पास ही कंप्यूटर था और 15 फीसदी से कम ग्रामीण परिवारों के पास इंटरनेट कनेक्शन था।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी पैदा हुई असमानता

इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी असमानता पैदा हुई है, जिसके लिए कहा गया है कि सबसे गरीब 20 फीसदी में से केवल 6 फीसदी के पास ही बेहतर स्वच्छता के नॉन-शेयर्ड स्रोतों तक पहुंच है, जबकि टॉप 20 फीसदी आबादी में ये आंकड़ा 93.4 फीसदी का है। भारत की 59.6 फीसदी आबादी एक कमरे या उससे कम जगह में रहती है। कोरोना वायरस महामारी से निपटने को लेकर, बहुत बड़ी आबादी के लिए हाथ धोने और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने जैसे उपायों को अपनाना संभव नहीं था।

वहीं गरीब परिवारों से संबंधित गर्भवती महिलाओं को अक्सर स्वास्थ्य मदद नहीं मिल पाती थी क्योंकि ज्यादातर सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों को COVID-19 टेस्टिंग सुविधाओं और अस्पतालों में बदल दिया गया था।

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