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Must Read: खुद को असल राजपूत बताने वाली करणी सेना आज की पद्मावती के लिए क्यों नहीं लड़ी!

बॉलीवुड की सबसे विवादास्पद फिल्मों में से एक ‘पद्मावत’ रिलीज हो चुकी है। तमाम विरोध के बावजूद फिल्म की खूब तारीफ हो रही है। लेकिन इस फिल्म ने सिनेमाघर तक पहुंचने के सफर के दौरान CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) और सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बावजूद भी कई मुश्किलों का सामना किया है। करणी सेना.. या कहे कि बस में मासूम बच्चों पर हमला करने वाले कायर सेना ने फिल्म को हिंदू धर्म, राजपूतों की शान और नारी अस्मिता से जोड़कर कई राज्यों में जमकर तोड़फोड़ किया। इन राज्यों में खासकर बीजेपी शासित राज्य गुजरात, राजस्थान, मध्य-प्रदेश और हरियाणा राज्य थे और इन राज्यों में प्रशासन ने भी कई बार खुले मंच से या इशारों ही इशारों में इस फिल्म को किसी भी कीमत पर रिलीज न होने देने की अपील की।

 

अब मामला समझते हैं कि विवाद हुआ क्यों? दरअसल, राजपूतों का प्रतिनिधित्व करने वाली करणी सेना ने शुरू में इस बात पर विरोध किया था कि पद्मावती फिल्म में पद्मावती का किरदार निभाने वाली दीपिका पादुकोण और अलाउद्दीन खिलजी का किरदान निभाने वाले रणवीर सिंह के बीच प्रेम प्रसंग वाले कुछ ऐसे सीन है जो कभी हुआ ही नहीं। फिर बाद में करणी सेना और हिंदू संगठनों द्वारा ‘जौहर’ करने वाली महिला (आग में कूदकर जान देने वाली महिला) को मां कहकर तो कभी आदर्श कह कर महामंडित किया जाने लगा और दूसरी ओर दीपिका पादुकोण की नाक और डायरेक्टर संजय लीला भंसाली का सिर काटकर लाने वाले लोगों को करोड़ों रुपये का इनाम देने की घोषणा कर दी गई।

 

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हास्यपद है कि एक मर चुकी महिला की कथित रक्षा के लिए, किरदार निभाने वाली जिंदा महिला की नाक काटने के लिए कहने वाले महिला सम्मान की बात कर रहे हैं। इन विरोधों की बीच मैंने भी इस फिल्म को देखा। फिल्म में हिंदू रानी पद्मावती और मुस्लिम राजा खिलजी के बीच सपने में भी कोई प्रेम प्रसंग का सीन नहीं था। फिल्म में रानी पद्मावती खिलजी या किसी अनजान आदमी के सामने न नाचती हैं ना ऐसी कोई पोशाक पहनती हैं जिससे उनके शरीर के अंग ज्यादा दिखें। करणी सेना और राज्य सरकारों के विरोध के विपरित फिल्म में राजपूतों की वीरता शोर्य बलिदान की कहानी है।

 

बिना फिल्म देखकर विरोध करने वाले हिंदू संगठनों को मूर्ख कहना और बीजेपी शासित सरकारों को वोटबैंक के लिए आम जनता, प्राइवेट व सरकारी संपतियों को नुकसान पहुंचाने देने पर इन्हें अंधी और बहरी सरकार भी कहना गलत नहीं होगा। इस पूरे मामले में सत्ता का संदेश साफ है कि उत्पात मचा लो, किसी कानूनी कार्रवाई की चिंता मत करो, लेकिन वोट हमें ही देना।

 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने जब फिल्म को रिलीज करने की हरी झंडी दी थी, तब साफ कहा था कि ये राज्य सरकारों की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि CBFC से पारित हो चुकी फिल्म की रिलीज सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा था कि कानून-व्यवस्था राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है और वे उसका बहाना बनाकर फिल्म की रिलीज नहीं रोक सकते। लेकिन कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होने से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता।

 

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वहीं, सोचने वाली बात ये है कि इस तरह का हंगामा किसी जीती-जागती महिला के बलात्कार पर करणी सेना या हिंदू संगठनों ने कभी क्यों नहीं किया.. क्या महिलाओं के लिए सुरक्षित समाज देना राजपुतों या हिंदू संगठनों की जिम्मेदारी नहीं बनती?

 

देखा जाए तो इस फिल्म के विरोध के जरिए लोग ‘जौहर’ का महिमामंडन करना यानी आग में जलना आज के युग में महिमामंडिता किया जा रहा है। ये ज्यादातर लोग परंपरागत रूप से सती प्रथा का समर्थन कर रहे हैं और खुद कहते हैं कि वे महिला सशक्तिकरण का समर्थन कर रहे हैं। इन संगठनों के नजर में आक्रमणकारी से लड़कर मरने वाली लक्ष्मीबाई से ज्यादा सम्मान की पात्र आत्महत्या करने वाली पद्मावती हैं। आज के जमाने में इसका अर्थ निकलता है कि कोई इनपर हमला करें तो लड़कियां खुद मर जाए, इज्जद बच जाएगी।

 

आज की पद्मावती के लिए क्यों नहीं लड़ती करणी सेना

जितना समय एक फिल्म के विरोध करने में इन्होंने खर्च किया उतना समय अगर हर रोज आत्महत्या कर रहे किसान, बलात्कार और भ्रष्टाचार पर विरोध करते तो शायद तस्वीर कुछ और ही होती और आप नफरत के नहीं इज्जत के हकदार भी होते। बीजेपी शासित राजस्थान सरकार या करणी सेना को अगर सच में महिला सशक्तिकरण करना है तो जमीनी हकीकत जानना चाहिए और उसके लिए कुछ करना चाहिए। न कि वोट बैंक और मीडिया पब्लिसिटी के लिए फालतू का विवाद करना चाहिए।

 

साल 2011 के आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में महिला साक्षरता 52.7 प्रतिशत और पुरुष साक्षरता 80.5 प्रतिशत है। क्या आवाज उठाया आपने? देश में सबसे ज्यादा बाल विवाह के मामले राजस्थान में ही है। क्या महिला सम्मान के लिए कभी इसके खिलाफ आवाज उठाया? NCRB रिपोर्ट (2014) के मुताबिक, राजस्थान देश में महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा क्राइम के मामलें  में तीसरे स्थान पर है। डियर करणी सेना और फिल्म बैन कर महिला सम्मान करने वाली सरकार, क्या इसके लिए आपने कुछ किया?

 

मध्य-प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि पद्मावती राष्ट्र माता है। मुख्यमंत्री साहब तो रानी पद्मावती की मूर्ती भी बनवा रहे हैं। ये वो राज्य है जहां NCRB के मुताबिक साल 2016 में सबसे ज्यादा रेप केस सामने आए थे।

 

कानून अपना है जो करना होगा करेंगे

भंसाली का कत्ल करने वाले के लिए इनाम घोषित करने वाले हरियाणा बीजेपी के मुख्य मीडिया संयोजक व नेता सूरज पाल अमू को ‘कारण बताओ नोटिस’ भेज दिया गया। सूरज पाल अमू ने कहा था कि वे भंसाली और दीपिका का सिर काटने वाले को 10 करोड़ रुपए का इनाम देंगे।

 

सूरज पाल अमू ने जो कहा वह (IPC) भारतीय दंड संहिता की धारा 153A (धार्मिक विद्वेष फैलाना) और 503 (आपराधिक धमकी) के तहत दंडनीय अपराध है। जिसके तहत दोषी पाए जाने पर 5 साल की सजा हो सकती है। लेकिन हर मामले में कानून का पालन करना प्रशासन के लिए जरूरी नहीं होता.. ‘कारण बताओ नोटिस’ भी कोई चीज होती है। बीजेपी ने ‘कारण बताओ नोटिस’ ऐसे भेजा जैसे पता ही न हो भाई क्यों बोल दिया?

 

अंत में कहना चाहूंगा कि कौन सी फिल्म देखनी चाहिए कौन सी नहीं देखनी इसके लिए सेंसर बोर्ड बैठा है और रिलीज हो जाने के बाद दर्शकों के ऊपर निर्भर है कि वो फिल्म देखने जाए या नहीं। इस फिल्म के विरोध में जो माहौल बनाया गया उससे तो यहीं लगता है कि देश में संविधान और कानून की जरूरत नहीं है।

 

नोट: इस लेख को विबेक दुबे ने हमारे प्लेटफॉर्म पर लिखा है और पेशे से ये एक पत्रकार हैं।  यदि आप भी कुछ लिखना चाहते हैं तो फेसबुक पर मैसेज में या theindianclick@gmail.com पर हमें मेल भेज सकते हैं।

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