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प्रज्ञा ठाकुर और आतिशी मार्लेना
Photo Source: thequint.com

प्रज्ञा ठाकुर की जीत और आतिशी मार्लेना की हार, ये कैसा हिंदुस्तान?

प्रज्ञा ठाकुर और आतिशी मार्लेना चुनाव बाद सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों में एक बार फिर से नए भारत की झलक दिखी है, ये वही भारत है जिसमें एक आतंकवाद के मामले में संलिप्त उम्मीदवार को संसद का रास्ता दिखाया जाता है जबकि एक पढ़ी लिखी ऑक्सफॉर्ड ग्रेजुएट को हरा दिया जाता है। शायद यही है नए भारत की पहचान।

भारतीय जनता पार्टी ने 303 सीटें अपने दम पर जीती है इसके लिए वो बधाई के पात्र है, मोदी लहर दिखी नतीजों में भी और चैनलों में भी लेकिन मेरा एक सवाल देश की जनता से है कि क्या सच में हमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Sadhvi Pragya Singh Thakur) की संसद में जरूरत थी? क्या हमें आतिशी मार्लेना (Atishi Marlena) जैसी नेताओं की जो शिक्षा व्यवस्था की बात करती है उनकी सदन में आवश्यक्ता नहीं है।

लाखों वोटों के अंतर से जीतने वाली साध्वी प्रज्ञा पर मालेगांव हमले में शामिल होने के आरोप है, वो जेल में रही और फिलहाल बेल पर बाहर है। एक ऐसे उम्मीदवार को हम लोग चुनते हैं जो गाय पर अलग तरह से हाथ फेरने से कैंसर की बीमारी ठीक होने का दावा करती है। लेकिन हम एक ऐसे नेता को बाहर का रास्ता दिखा देते हैं जो पढ़ी-लिखी है और लंबे वक्त से दिल्ली के सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाते हुए गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए कदम उठा रही हैं।

प्रज्ञा ठाकुर ने मुंबई हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे को लेकर विवादित बयान दिया था और कहा था कि मुझे गलत तरीके से फंसाया, वो अपने कर्मों की वजह से मरे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार इस बात पर जोर दिया है कि वो शहीदों का सम्मान करते हैं तो फिर ये सम्मान हेमंत करकरे के लिए क्यों नहीं सामने आया? क्या प्रधानमंत्री शहीद हेमंत के साथ सौतेला रवैया नहीं अपना रहे हैं।

साथ ही वो कहते हैं कि कभी भी प्रज्ञा को बापू के अपमान के लिए माफ नहीं कर पाएंगे। अब माफ नहीं कर पाएंगे का क्या मतलब होता है। क्या ये कि प्रज्ञा ठाकुर जब पीएम मोदी के सामने आएंगी तो वो मुंह फेर लेंगे? प्रज्ञा ठाकुर ने महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को सबसे बड़ा देशभक्त बताया था।

साध्वी प्रज्ञा पर 6 लोगों की हत्या का इल्जाम है। ऐसे लोग जो बम ब्लास्ट में आरोपी है, वो संसद में हमारे देश का कानून बनाएंगे, मध्य प्रदेश के सबसे नामी भोपाल का प्रतिनिधित्व करेंगे। तो हां इस नए भारत की नई जनता को जरूर मंथन करने की जरूरत है। 4 मीम शेयर कर के हर-हर मोदी या फिर राहुल गांधी को पप्पू कह कर अगर कुछ बदला जा सकता तो संसद भी सोशल मीडिया पर ही चला दी जाती।

लेकिन हम सभी जानते हैं कि देश में जो भी बदलाव आएगा वो संसद के माध्यम से आएगा जहां पर हमें पढ़े-लिखे और मुद्दों की राजनीति करने वाले नेताओं की जरूरत थी, ना कि गाय को डॉक्टर बनाने वाली की।

आतिशी मार्लेना पूर्वी दिल्ली सीट से AAP उम्मीदवार थी। आतिशी की पढ़ाई दिल्ली के स्प्रिंगडेल स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज से बैचलर डिग्री हासिल की। उन्होंने सेंट स्टीफेंस में टॉप किया था। जिसके बाद उन्होंने रोड्स स्कॉलरशिप लेकर ऑक्सफोर्ड से मास्टर्स किया।

आतिशी ने हैप्पीनेस करिकुलम की शुरुआत की है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों को हैप्पीनेस करिकुलम नाम का दिलचस्प कोर्स पढ़ाया जाता है, जोकि पूरे भारत में पहली बार है। आतिशी मार्लेना शिक्षा के मामले में दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की सलाहकार रह चुकी हैं। सलाहकार के तौर पर काम करने के लिए वो दिल्ली सरकार से बस 1 रुपये प्रति महीने सैलरी लेती थी।

मैं कोई आम आदमी पार्टी का समर्थक नहीं हूं और ना ही मोदी विरोधी हूं, हां सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना अपना हक समझता हूं जो करता रहूंगा। लेकिन इस पोस्ट के जरिये मेरा सवाल जनता से है कि क्यों एक काबिल महिला हार जाती है क्योंकि शायद उसका धर्म समझ में नहीं आया और एक भगवा रंग के कपड़े पहन आतंक के आरोपों में लिपटी महिला जीत जाती है क्योंकि उसका पहनावा हमें उसका मजहब दर्शाता है।

खैर प्रज्ञा ठाकुर और आतिशी मार्लेना में से प्रज्ञा अब संसद में पहुंच गई, इंतजार है साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट मिलने का, उम्मीद है जल्दी ये भी होगा।

By Taranjeet Sikka

(Photo Source)

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