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Ramjan kyu manate hai in hindi

रमजान के महीने में रोजे रखने वालों के लिए जानिए जरूरी नियम

हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि रमजान क्यों मनाते हैं ताकि आप अपने धर्म या दूसरों के धर्म के बारे में बेहतर तरीके से समझ सकें।रमजान के महीने में रोजा रखते समय किन-किन बातों को ध्यान में रखना पड़ता है?

रोजे के दिन रोजा खोलने के नियम क्या है? कौन-कौन रोजा रख सकता है? इन सभी सवालों के जवाब हम देंगे।

 

रमजान क्यों मनाते हैं? (Ramzan kyu manate hai in hindi)

चलिए जानते हैं कि रमजान क्यों मनाते हैं या रमजान क्यों मनाया जाता है? ताकि जब आपसे कोई पूछे कि रमजान पर्व के बारे में आप क्या जानते हैं तो आप जवाब दे सकें।

रमजान या रमदान का महीना मुस्लिम समुदाय के लिए सबसे ज्यादा पाक  (पवित्र) माना जाता है। रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। यह महीना कभी 29 दिन का तो कभी 30 दिन का होता है। रमजान को नेकियों (भलाई ) का मौसम भी कहा जाता है।

रमजान का सच

ये है कि मुस्लिम समुदाय में रमजान में रोजे रखने का इतिहास काफी पुराना है। इस महीने के पवित्र होने का कारण ये है कि पैगंबर साहब को अल्लाह ने अपने दूत के रूप में चुना था! पैगंबर साहब को अल्लाह ने अपनी पाक किताब कुरान शरीफ दिया था।

इस धर्म की मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि मोहम्मद साहब (इस्लामिक पैगम्बर) को साल 610 ईसवी में इस्लाम की पवित्र किताब कुरान शरीफ का ज्ञान हुआ तो तब से ही रमजान महीने को मुस्लिम समुदाय में सबसे पवित्र (पाक) महीने के रूप में मनाया जाने लगा था।

रमजान के महीने में अल्लाह की इबादत की जाती है और अपने गुनाहों (पापों )की माफी मांगी जाती है। माना जाता है कि इस महीने में की गई इबादत का फल 70 गुना अधिक मिलता है।

ramzan kyu manate hai
source : jansatta

रमजान क्यों मनाते हैं तो आप जान गए अब ये भी जान लीजिए कि रमजान के महीने में रोजे रखने का मतलब सिर्फ भूखा रहना ही नहीं होता बल्कि कुछ जरूरी नियमों का पालन करना भी होता है। ये बात हर रोजे रखने वालों के लिए बहुत जरूरी है।

– रोजा रखने के दौरान खाने के बारे में कभी नहीं सोचना चाहिए।

– पूरे दिन अपने मन को साफ रखना होता है कोई बुरा ख्याल मन में नहीं लाना होता।

– किसी की भी बुराई और बदनामी के बारे में सोचना नहीं चाहिए।

– रमजान के महीने में रोज दिन में 5 बार नमाज पढ़ने का नियम भी है।

रोजे के दिन रोजा खोलने के नियम

– इस दौरान हर रोज सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रोजा (उपवास) रखते हैं। रोजा रखने वाले दिन में दो बार खाना खाकर रोजा खोलते हैं।

– सूरज निकलने से पहले ही सहरी (भोजन ) खाने का नियम होता है। सूरज निकल जाने के बाद आप ना पानी पी सकते हैं और ना ही खाना खा सकते हैं।

– इसके अलावा दिन में शाम ढलने के बाद  इफ्तार करने का भी नियम होता है जिसमें सूरज अस्त होने के बाद भोजन करते हैं लेकिन इससे पहले खुदा की इबादत करना होता है।

 रोजा खोलने के नियम

– इसके अंदर रोजे को खजूर खाकर तोड़ा जाता है उसके बाद ही दूसरी और चीजें खाई जाती है।

कौन-कौन रख सकता है रोजा

– सभी मुस्लिम पुरुष और महिलाओं का रोजा रखना जरूरी है केवल नाबालिक, महावारी के दौरान की महिलाएं, गर्भवती महिलाएं और वे लोग जो बीमार है उन्हें रोजा नहीं रखने की छूट होती है।

बुरी आदतों को छोड़ना जरूरी

–  रोजे के महीने में मुस्लिमों को स्मोकिंग, शराब का सेवन आदि जैसी नशीले पदार्थों को छोड़ना होता है।

 

रमजान के महीने में अगर कोई गलती से भी इन सभी नियमों का पालन नहीं करता तो उसे उसके रोजा रखने का फल नहीं मिलता है।

ईद क्यों मनाई जाती है? क्या है इसे मनाने का तरीका

रमजान के कितने दिन बाद ईद आती है?

अंत में आपको बताते हैं कि रमजान के 30 दिन बाद क्या आता है? नए चांद के साथ शुरू हुए रोजे अगले 30 दिनों के बाद नए चांद के साथ ही खत्म होते हैं। रमजान की आखिरी दिन चांद देखकर अगले दिन ईद मनाई जाती है यानी नया चांद देखकर ही। अगर आखरी दिन चांद नहीं दिखा तो रोजे का 30 वां दिन पूरा होने के बाद ईद मनाई जाती है।

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