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आसान भाषा में जानिए क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट?

मित्रों, नॉट दैट मोदी वाला मित्रों… आपने RBI क्रेडिट पॉलिसी (आर्थिक समीक्षा नीति) के दौरान रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और CRR जैसे शब्द जरूर सुने होंगे। लेकिन क्या आप इन शब्दों के मतलब भी जानते हैं? अगर आप जानते हैं तो अच्छी बात है और नहीं जानते हैं तो भी अच्छी बात है क्योंकि यहां हम इनके बारे में बताने वाले हैं…

रेपो रेट

देखिए एक होता है इंटरेस्ट रेट (ब्याज दर) जिस पर हम बैंकों से लोन लेते हैं या बैंक हमें कर्ज देते हैं। दूसरा होता है रेपो रेट, यह वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बैंकों को कर्ज देता है। इसके कम होने का मतलब ये निकलता है कि बैंकों से आपको मिलने वाले कई प्रकार के कर्ज सस्ते हो जाएंगे और इसके बढ़ने से होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह सब महंगे हो जाएंगे।

रिवर्स रेपो रेट

रिवर्स रेपो रेट, रेपो रेट के विपरीत होता है। रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों द्वारा RBI में जमा धन पर इंटरेस्ट यानी ब्याज मिलता है। यह कुछ वैसा ही है जैसे हमें सेविंग अकाउंट में या फिक्स डिपोजिट में पैसे जमा कराने के बाद ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट मार्केट में कैश फ्लो को कंट्रोल करने में काम आती है। मार्केट में जब भी बहुत ज्यादा कैश हो जाता है, RBI रिवर्स रेपो रेट को बढ़ा देता है। ऐसा इसलिए ताकि बैंक RBI से ज्यादा ब्याज कमाने के लिए पैसा जमा करा दें।

CRR

CRR का मतलब कैश रिजर्व रेशियो होता है, इसे नकद आरक्षित अनुपात भी कहते हैं। दरअसल, देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत सभी बैंकों को अपने कुल कैश का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास रखना होता है और इसे ही CRR कहते हैं।

SLR

SLR का फुल फॉर्म स्टेट्यूटरी लिक्विड रेशियो है। यह वह दर होती है जिस दर पर खुद सभी बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते हैं। इसका इस्तेमाल कैश फ्लो को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। कमर्शियल बैंकों को एक खास अमाउंट डिपोजिट करानी होती है जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी ट्रांजैक्शन यानी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है। जब RBI ब्याज दर में बदलाव किए बिना कैश फ्लो कम करना चाहता है तो वह CRR बढ़ा देता है, इससे बैंकों के पास कर्ज देने के लिए कम कैश बचता है।

MSF

RBI ने पहली बार फाइनेंसियल ईयर 2011-12 में सालाना मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू के दौरान MSF (मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी) का जिक्र किया था और यह 9 मई 2011 को लागू हुआ। MSF के तहत सभी शेड्यूल कमर्शियल बैंक एक रात के लिए अपने कुल डिपोजिट का 1 प्रतिशत तक कर्ज ले सकते हैं।

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