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अपराध के लिए कौैन हैं जिम्मेदार: आदमी, औरत या इंसान?

अपराध हमारे समाज का वो हिस्सा बन चुका है जिससे जुड़ी खबरें रोज हमें देखने और सुनने को मिलती रहती है। अपराध क्या है, क्यों होता है और इसके पीछे जिम्मेदार कौन है? यह वो सवाल है जो आज कुछ ही लोग जानते होंगे।

 

यौन शोषण करने वाले बाबा धार्मिक परिवारों का फायदा उठाते हैं और भक्त के रोजमर्रा के मुद्दों को सुलझाने के लिए और सुझाव देने के बदले पैसे मांगते हैं।

एक महिला जो एक आदमी को फंसाकर उससे सेक्स की बातें करती है और फिर सेक्स चैट, कॉल रिकॉर्ड के जरिए ब्लैकमेल करती है।

एक मुस्लिम आदमी खुद को ऐसा दिखाता है जिससे वह न केवल एक हिंदू महिला को आकर्षित करता है बल्कि महिला का धर्म बदलने की कोशिश भी करता है।

एक ऐसी महिला है जो एक आदमी बनकर दहेज लेने की मंशा से दूसरी महिला से शादी कर लेती है।

 

तो इन सभी अपराधों का कोई अंत नहीं है। हर दिन जब मैं जागता हूं तो ऐसी खबरें सुनकर मुझे हैरानी होती है।

इन अपराधों के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या यह एक आदमी हैएक महिला है या फिर हम सभी हैं?

 

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एक हालिया केस जहां औरत आदमी बनीं

स्विटी सेन नाम की एक महिला ने 2013 में एक फेक फेसबुक अकाउंट बनाया जिसका नाम रखा कृषण सेन और खुद का रूप एक आदमी की तरह बना लिया, अपनी कई तस्वीरें भी पोस्ट कीं। धीरे-धीरे वह आगे बढ़ी और कुछ महिलाओं से बात करना शुरू किया। यह 25 साल की महिला कथित रूप से चार साल तक एक आदमी के रूप में रही और महिलाओं से दहेज के लिए शादी करने लगी। यह एक मास्टर प्लान की तरह लगता है, लेकिन यह आंखे खोलने वाली घटना है। अपराध का लोगों के लिंग से कोई भी संबंध नहीं होता, चाहे पुरूष हो या फिर महिला अपराध कोई भी कर सकता है और किसी के भी साथ किया जा सकता है।

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क्राइम पेट्रोल, सावधान इंडिया और बाकी क्राइम शो ने लोगों के मन में ये विचार डाल दिया है कि ज्यादातर आदमी औरत को या तो मारने या रेप करने आ रहे हैं या फिर उसके चेहरे पर तेजाब फेकने आ रहे हैं। लेकिन हकीकत कुछ और है। आपको बता दें कि कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां महिला ने ऐसा ही काम एक पुरूष के साथ किया है। क्राइम कोई भी करे, ये काफी भयानक है लेकिन ये वैसा नहीं है जैसा समाज के लोग क्राइम को देखते हैं।

उत्तर प्रदेश से एक घटना सामने आई थी जब एक महिला ने अपने प्रेमी के मुंह पर तेजाब फेका। उत्तर प्रदेश के बिजनोर की इस घटना ने यह बात बताई कि अपराध का कोई जेंडर नहीं होता। यह एक धारणा है कि सिर्फ आदमी ही किसी के साथ दुष्टता करता है और महिला को शारीरिक नुकसान पहुंचाता है लेकिन हम इस तरह के मामलों को संबोधित क्यों नहीं करते जहां एक महिला अपराधी है और अपना समर्थन उस आदमी को क्यों नहीं देते जो इसका शिकार है।

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आदमी हिंसा करता है लेकिन एक औरत हनी ट्रैपिंग का इस्तेमाल करती है

एक आदमी अपनी सोच को हिंसा में बदलता है और उसे क्राइम का रुप देता है। लेकिन महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। एक औरत आदमी को अपने मतलब से पैसे की लालच में हनी ट्रैपिंग के जरिए फंसाती है।

 

सिर्फ औरत को ही नहीं आदमी को भी चाहिए सुरक्षा

हम गैंग रेप, महिलाओं को नुकसान पहुंचाने वाले पुरुषों और मानवता के अस्तित्व पर बात करते हैं। हां बलात्कार पीड़ितों ने बहुत दुख झेला है। फिर भी क्या हमने कभी एक ऐसे इंसान के बारे में सोचा है जो निर्दोष था, लेकिन एक महिला के साथ कुछ गलत करने के आरोप में जबरदस्ती समाज में शर्मिंदा हुआ? क्या हमने कभी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बात की जो निर्दोष था और उसने शर्मिंदगी की वजह से आत्महत्या कर ली?

BBC न्यूज के सर्वे के मुताबिक साल 2013-14 के दौरान दिल्ली में कई बलात्कार के मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन उनमें से महिलाओं की आधी आबादी झूठी थी और उनके पास कोई सबूत नहीं था।

एक ऐसा ही मामला था, जहां एक 44 साल के व्यक्ति ने एक कर्मचारी को पैसे उगाही करते हुए पकड़ा और पुलिस के पास जाने की धमकी दी। बाद में उस पर महिला से बलात्कार करने का आरोप लगाया गया था और तुरंत उसे एक अपराधी करार दिया गया था। हालांकि उसके पास सच्चाई दिखाने का सबूत था और वह इस केस में बाइज्जत बरी हो गया। लेकिन उन लोगों का क्या…जो आरोपों से बाहर आने में सक्षम ही नहीं हैं?

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यौन शोषण पुरुषों के साथ भी होता है

जैसे ही मैं ‘बलात्कारी’ शब्द बोलूंगा तो आपके दिमाग में एक पुरूष की किसी महिला पर हावी होती हुई तस्वीर बन जाएगी, ऐसा क्यों? क्या सिर्फ पुरुष ही अपना आत्म संयम खोकर बलात्कार करते हैं?  ऐसे कई मामले भी सामने आए हैं जिनमें यौन शोषण महिलाओं द्वारा किया गया है। Mirror.co.uk ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें एक व्यक्ति ने अपने ऊपर हुए यौन शोषण का खुलासा किया था।

इन सभी केस को जानने के बाद मुझे लगता है कि मुझे अपने कई सवालों के जवाब मिल गए। अपराध का किसी से कोई भी लेना-देना नहीं है चाहे वो एक आदमी हो, औरत हो या ट्रांसजेंडर। मायने सिर्फ हमारी सोच का है और कैसे अलग-अलग लोग अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करते हैं।

मुझे लगता है कि मैंने बहुत कुछ कह दिया और अब मुझे ये आप पर सोचने के लिए छोड़ देना चाहिए। आपको क्या लगता है अपराध के लिए कौन जिम्मेदार है ?

 

“मेरा इरादा किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं है और न ही समाज के किसी वर्ग पर निशाना साधना है। ये सारी घटनाएं किसी औरत का मजाक उड़ाने के लिए नहीं है बल्कि ये एहसास दिलाने के लिए है कि अपराध की शुरुआत किसी जेंडर से नहीं होता। समानता और फेमिनिज्म के बारे में बात करने से पहले मुझे लगता है कि ये जानना ज्यादा जरूरी है कि फेमिनिज्म रातों रात नहीं आएगा और ये किसी मेल या फीमेल जेंडर को ऊपर उठाना और दूसरे को नीचा दिखाना नहीं है।”- रोहित पटवाल

 

नोट: इस लेख को रोहित पटवाल ने हमारे प्लेटफॉर्म पर लिखा है और पेशे से ये एक पत्रकार हैं।  यदि आप भी कुछ लिखना चाहते हैं तो फेसबुक  पेज पर मैसेज में या theindianclick@gmail.com पर हमें मेल भेज सकते हैं।

 

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