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Sadhvi Jaya Kishori Krishna Rajasthan जया किशोरी

कौन है साध्वी जया किशोरी, जिसके 22 की उम्र में 10 लाख से ज्यादा हैं फॉलोअर्स?

हमारे देश में या यूं कहे कि हमारे समाज में एक सिस्टम है- पढ़ाई-तैयारी-नौकरी-करियर-लाइफ। इसी सिस्टम के साथ भारत में पैदा होने वाले हर बच्चे को चलना पड़ता है। इसके अलावा कोई ऑप्शन नहीं है और जो ऑप्शन सा लगता है, वो भी अंत में इसी सिस्टम में फंस जाता है। लेकिन जया किशोरी (Jaya kishori) जैसे कुछ लोग होते हैं जो इस सिस्टम से बाहर निकल पाते हैं।

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आज हम आपको बताएंगे साध्वी जया किशोरी के बारे में जो सिर्फ 22 साल की हैं और फिर भी उनके भक्तों की संख्या लाखों में है। जया किशोरी (Jaya Kishori) राजस्थान के सुजानगढ़ की रहने वाली हैं। वह एक गौड़ ब्राह्मण परिवार में साल 1996 में जन्मी। जया के घर में पूजा-पाठ का माहौल था, तो इसलिए बचपन से ही उनका झुकाव कृष्ण की ओर रहा।

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जब वह 9 साल की थी तब ही संस्कृत में लिंगाष्टकम्, शिव-तांडव स्तोत्रम्, रामाष्टकम् आदि स्तोत्र गा लेती थीं। जब 10 साल की हुईं तो जया ने अकेले सुंदर कांड का पाठ किया। तभी से जया ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। सत्संग आदि के साथ-साथ जया की पढ़ाई भी चलती रही।
जया ने कोलकाता के महादेवी बिड़ला वर्ल्ड एकेडमी से पढ़ाई पूरी की हैं। जया ने अपनी शुरुआती दीक्षा पंडित गोविंदराम मिश्र से ली थी।

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पंडित जी जया को राधा कहकर बुलाते थे और उन्होंने ही कृष्ण के प्रति प्रेम को देखते हुए जया को ‘किशोरी जी’ की उपाधि दी थी। इसके बाद से ही जया अपने भक्तों के बीच ‘जया किशोरी जी’ के नाम से पहचानी जाती हैं।

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Jaya Kishori अपने भक्तों के बीच कितनी प्रसिद्ध हैं, इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि जब वो ‘नानी बाई का मायरा, नरसी का भात’ नाम से सत्संग करती हैं, तो लाखों की भीड़ जुटती है। फेसबुक पर साध्वी ‘जया किशोरी जी’ के पेज पर 9 लाख से ज्यादा लाइक हैं और 10 लाख लोग उन्हें फॉलो करते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जया किशोरी के सत्संग से जो भी पैसा इकट्ठा होता है, उसे नारायण सेवा ट्रस्ट, उदयपुर को दान कर दिया जाता है। इस दान में मिले पैसे को ट्रस्ट विकलांगों की मदद करता है।

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