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पीरियड्स से लड़ने के लिए सरकार का बड़ा कदम, अब सैनेटरी पैड 2.5 रुपये की कीमत पर मिलेगा

आज जहां पूरे विश्व में महिला दिवस मनाया जा रहा है। तो ऐसे में भारत सरकार ने भी भारतीय महिलाओं को एक खास तोहफा दिया है। भारतीय सरकार ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर ‘आधी आबादी’ को एक खास तोहफा दिया है। सरकार ने बायॉडिग्रेडिबल सैनिटरी नैपकिन लॉन्च किए हैं। इसमें हर एक पैड की कीमत 2.50 रुपये हैं और इसे प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना केंद्रों से आसानी से खरीदा जा सकता है। सैनिटरी नैपकिन के एक पैक में 4 पैड होंगे और इसकी कीमत सिर्फ 10 रुपये होगी।

आपको बता दें कि आज भी हमारे देश में महिलाएं पीरियड्स के वक्त सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करने की जगह पर कपड़ा या फिर किसी और चीज का इस्तेमाल करती हैं। इसके पीछ की एक सबसे मुख्य वजह ये भी हैं कि हर महिला इसे खरीद नहीं पाती हैं और कुछ महिलाओं को इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं हैं। अब ऐसे में सरकार की तरफ से उठाया गया ये कदम काफी सराहनीय हैं। बस उम्मीद ये की जाएं कि इसका सही तरह से इस्तेमाल हो सकें।

सरकार की तरफ से इन नैपकिन को रसायन और उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने लॉन्च किया है। अनंत कुमार ने कहा कि 28 मई, 2018 को अंतरराष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता दिवस से देश के सभी जन-औषधि केंद्रों पर ये नैपकीन मिलने शुरु हो जाएंगे। मंत्री ने कहा कि रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अंदर आने वाला फार्माशूटकल डिपार्टमेंट ‘सुविधा’ नाम से सैनिटरी नैपकिन लॉन्च कर रहा है।

मंत्री ने कहा कि जब बाजार में 4 सैनिटरी नैपकिन की औसतन कीमत 32 रुपये है और सरकार ने इतने ही ऑक्सो-बायॉडिग्रेडिबल पैड्स को 10 रुपये में उपलब्ध कराया है। ये भारत की वंचित महिलाओं के लिए स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुविधा सुनिश्चित कराने की तरफ कदम है। उन्होंने कहा कि बाजार में उपलब्ध बाकी सैनिटरी नैपकिन नॉन बायॉडिग्रेडेबल हैं जबकि ये बायॉडिग्रेडेबल हैं।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन सभी महिलाओं के लिए ये एक विशेष उपहार है, क्योंकि ये अनोखा उत्पाद किफायती और स्वास्थ्यकर होने के साथ ही इस्तेमाल और निपटान में आसान है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार 15 से 24 साल की 58 प्रतिशत महिलाएं स्थानीय स्तर पर तैयार नैपकीन, सैनिटरी नैपकीन और रूई का इस्तेमाल करती हैं और शहरी क्षेत्रों की 78 प्रतिशत महिलाएं पीरियड्स के दौरान सुरक्षा के लिए स्वस्थ विधियां अपनाती हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में केवल 48 फीसदी महिलाएं साफ-सुथरा सैनिटरी नैपकीन का इस्तेमाल करती हैं।

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