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PM मोदी की बात सच निकलीं, ये शख्स जलाता है नाले की गैस से चूल्हा

बीते 10 अगस्त को बायोफ्यूल डे था। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर संबोधन के दौरान नाले की गैस से चाय बनाने वाला किस्सा सुनाया था। जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने मोदी का खूब मजाक उड़ाया। लेकिन मोदी की यह बात सच साबित हुई।

 

क्या कहा था PM मोदी ने?
PM मोदी ने कहा था कि “मैंने एक अखाबर में पढ़ा था कि शहर में नाले के पास ठेला लगाकर एक व्यक्ति चाय बेचता था। उसके दिमाग में एक विचार आया। स्वाभाविक है कि गंदी नाली में गैस भी निकलती है। दुर्गंध भी आती थी। उसने एक बर्तन को उल्टा करके, उसमें छेद किया और पाइप डाल दिया। जो गटर से गैस निकलती थी उसे अपने चाय के ठेले पर ले लिया। इसके बाद वह इसी गैस से चाय बनाने लगा। सिंपल सी टेक्नोलॉजी है।”

 

कौन है वह व्यक्ति जिसका जिक्र PM मोदी ने किया था?
आज तक, ANI, Zee हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाले एक शख्स श्याम राव शिर्के ने देसी उपकरण तैयार किया है, जिसकी मदद से नालियों से निकलने वाली मीथेन गैस को रसोई गैस के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, श्याम राव शिर्के इस प्रोजेक्ट को ग्लोबल पेटेंट भी कर चुके हैं।

 

हकीकत में ऐसे काम करती है मशीन
रायपुर के रहने वाले 60 साल के श्याम राव शिर्के द्वारा बनाई गई इस मशीन में प्लास्टिक के तीन ड्रमों अथवा कंटेनर को आपस में जोड़ कर उसमें एक वॉल्व लगा दिया जाता है। ये तीनों कंटेनर नाले या नालियों के ऊपर उस जगह पर रख दिया जाता है, जहां से बदबूदार नाले का पानी गुजरता है। गंदगी कंटेनर में ना घुस जाए, इसे रोकने के लिए एक जाली लगा दी जाती है।

अब इसे जुगाड़ कहे या मशीन लेकिन इस जुगाड़ का पेटेंट हो चुका है। इस मशीन को इस तरह फिट किया जाता है कि ड्रम या कंटेनर में इकठ्ठा होने वाली गैस का इतना दबाव बन सके कि वो पाइपलाइन की मदद से उस स्थान पर पहुंच जाए जहां रसोई गैस का चूल्हा रखा है।

शिर्के के मुताबिक, कंटेनर या ड्रम में इकठ्ठा होने वाली गैस की मात्रा नाले की लंबाई, चौड़ाई और गहराई पर निर्भर करती है। शिर्के का कहना है कि रायपुर में जिस स्थान पर उन्होंने इस उपकरण को लगाया था उस घर में लगातार 3-4 महीने तक 10-12 से ज्यादा व्यक्तियों का सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन बन जाता था।

 

तो कौन हैं श्याम राव शिर्के?
रायपुर के चंगोराभाठा इलाके में रहने वाले श्याम राव शिर्के ना कोई पेशेवर इंजीनियर हैं और नहीं कोई इससे जुड़ी डिग्री है। रिपोर्ट के मुताबिक, शिर्के 11वीं पास हैं। उनकी आय मैकेनिकल कॉन्ट्रैक्टरशिप पर निर्भर है। तबियत ठीक ना होने की वजह से अब शिर्के पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं। लेकिन कुछ नया करने की धुन उनके सिर पर इस तरह सवार रहती है कि वो कोई ना कोई नया तकनीक या उपकरण ईजाद करने में जुटे रहते हैं।

 

बिना जांचे-परखे ना ताली बजाना चाहिए और नहीं असंभव मान लेना चाहिए
प्रधानमंत्री हो या कोई भी हो, अगर कोई कुछ ऐसा कहता है जो आपको नामुमकिन लगता है, तो हो सकता है कि ये किसी के लिए मुमकिन हो। बिना जांचे-परखे ना ताली बजाना चाहिए और नहीं असंभव मान लेना चाहिए।

गांव में गोबर गैस को रसोई गैस में बदलकर उससे चूल्हा जलाया जाता था, ये आपने सुना होगा। लेकिन बकायदा इसके लिए प्रक्रिया होती थी। लेकिन जिस तरह से मोदी ने आसान भाषा में किस्सा सुनाया, उसपर लोगों को यकीन करना मुश्किल हो रहा था।

क्योंकि मोदी ने सिर्फ यही कहा था कि “एक व्यक्ति ने बर्तन को उल्टा करके, उसमें छेद किया और पाइप डाल दिया। जो नाले से गैस निकलती थी उसे अपने चाय के ठेले पर ले लिया।” लेकिन मुमकिन है, मोदी ने शायद विस्तार में ना जाकर दो लाइन में अपनी चाय वाली बात खत्म कर दी हो।

देखें वीडियो, कैसे मोदी की बात सच है-

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पहले भी आ चुकी है ऐसी खबर

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हालांकि ये तो सच है कि नाले में से गैस निकलती है। साल 2013 में The Hindu ने एक रिपोर्ट की थी। खबर चेन्नई की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि गटर से निकने वाली मीथेन गैस से महिलाएं किस तरह किचन में खाना बनाती थी।

 

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