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ओपिनियन पोल क्या होता है और कैसे कराया जाता है सर्वे? जानिए

आज हम आपको बताएंगे ओपिनियन पोल क्या है? क्‍या होता है एग्जिट पोल, कैसे कराया जाता है सर्वे? क्या होता है पोस्ट पोल सर्वे? इस सभी सवालों के जवाब हम देंगे।

लोकसभा चुनाव 2019 अपने अंतिम पड़ाव पर है। 23 मई को रिजल्ट भी आने वाला है। अक्सर चुनाव के दौरान आप टीवी और अखबारों में बड़े हाई TRP वाले एग्जिट, ओपिनियन और पोस्ट पोल देखते होंगे। जितने मजे से हम उन्हें देखते हैं असल में इन्हें बनाना उतना ही मुश्किल होता है।

What is opinion poll in hindi

एग्जिट पोल या सर्वे में सैंपल लेने की प्रक्रिया काफी मुश्किल होती है। सैंपलिंग को समझने से पहले हम ये जानते हैं कि एग्जिट पोल, पोस्ट पोल सर्वे और ओपिनियन पोल होते क्या है ओपिनियन पोल तीन भागों में बंटता है- प्री-पोल, एग्जिट-पोल और पोस्ट-पोल। ये सभी एक दूसरे से अलग होते हैं।

ओपिनियम पोल क्या है, ओपेनियन पोल 2019

एग्जिट पोल क्या है?

एग्जिट पोल (Exit Poll) के नतीजे हमेशा मतदान के आखिरी दिन ही जारी किए जाते है। हालांकि डाटा कलेक्शन जिस दिन वोटिंग होती है उस दिन भी किया जाता है। जब आखिरी फेस के वोटिंग के दिन मतदाता वोट डालकर निकल रहा होता है तब उससे पूछा जाता है कि उसने किसे वोट दिया है। इस आधार पर किए गए सर्वे से जो व्यापक नतीजे निकल कर सामने आते हैं। इसे ही एग्जिट पोल कहते हैं।

पोस्ट पोल क्या है?

पोस्ट पोल (Post Poll) एग्जिट के परिणाम ज्यादा सटीक होते हैं। एग्जिट पोल में सर्वे एजेंसी मतदान के तुरंत बाद मतदाता से राय जानकर मोटा-मोटा हिसाब लगा लेती हैं। जबकि पोस्ट पोल हमेशा मतदान के अगले दिन या फिर एक-दो दिन बाद होते हैं।

एग्जिट पोल में मतदाताओं के वोट देने के तुरंत बाद उनकी राय जानने की कोशिश की जाती है। सर्वे वाले लोग पोलिंग बूथ के बाहर ही ये कर रहे होते हैं। इसलिए मतदाता अपनी पहचान छुपाते हुए हड़बड़ी में राय बता देते हैं जोकि जरूरी नहीं कि सही ही हो। जबकि पोस्ट पोल में एक दिन बाद वोटर से बातचीत कर उसके मन को टटोलने की कोशिश की जाती है कि आखिर उसने किस उम्मीदवार को वोट दिया है। इस दौरान वो किसी कंफ्यूजन में नहीं होता है और लगभग सही-सही राय बता देता है।

ओपिनियन पोल क्या है?

ओपिनियन पोल (Opinion Poll) एग्जिट पोल से अलग होते हैं। ओपिनियन पोल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल पत्रकार, चुनावी सर्वे करने वाली एजेंसियां करती हैं। इसके जरिए पत्रकार विभिन्न मसलों, मुद्दों और चुनावों में जनता की नब्ज पकड़ने की कोशिश करते हैं। इसी को प्री पोल सर्वे भी कहा जाता है जिसमें चुनाव से पहले जनता का मूड जाना जाता है।

एग्जिट पोल 2019

कैसे होती है पोल के लिए सैंपलिंग?

ओपिनियन पोल तैयार करने में सबसे बड़ा काम फील्ड वर्क होता है। इसकी सैंपलिंग के लिए चुनावी सर्वे करने वाली एजेंसियों के कर्मचारी आम लोगों से मिलते हैं और कुछ सवाल पूछते हैं। कैंडिडेट अच्छा है या बुरा। इस आधार पर भी एक मोटा-मोटी राय बना ली जाती है। वहीं इस, दौरान जिन लोगों को शामिल किया जाता है उन्हें एक फॉर्म भी भरने को दिया जाता है। इस फॉर्म को भरवाने की भी एक लंबी प्रक्रिया होती है।

मतदाताओं की पहचान गुप्त रहे और वो बेझिझक आपनी राय दे दें। इसके लिए एक सीलबंद डिब्बा रखा जाता है। ताकि वो अपने पसंद के उम्मीदवार के बारे में भरा पर्चा उसमें डाल दें। ओपिनियन पोल में सबसे महत्वपूर्ण चीज सैंपलिंग होती है। सैंपलिंग का मतलब है कि किन लोगों से राय जानने की कोशिश की गई है या की जाएगी।

कैसे होती है सैंपलिंग, क्या है प्रक्रिया?

ओपिनियन पोल में सिर्फ कुछ लोगों की राय पर नतीजे नहीं निकाले जा सकते हैं। अलग-अलग राज्यों, विधान-सभाओं और क्षेत्र विशेष की सैंपलिंग का तरीका अलग-अलग होता है। जैसे मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में सैंपलिंग का आधार अलग-अलग होगा। क्योंकि यूपी और बिहार में जिस व्यक्ति से उसकी राय जानने की कोशिश की जाएगी उस व्यक्ति के सामाजिक पृष्ठभूमि, जाति और धर्म का भी ध्यान रखना होगा।

अगर सोशल बैकग्राउंड, कास्ट और रिलिजन को ध्यान में रखकर सर्वे किया जाए तो 5000 के सैंपल साइज से भी सटीक निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। मध्यप्रदेश में जातिगत वोटर्स की सैंपलिंग इससे अलग होगी। वहीं यूपी-बिहार में मुस्लिम और दलित बाहुल्य आबादी वाले क्षेत्रों में उनकी आबादी के प्रतिशत के हिसाब से रैंडम सैंपल लिया जाएगा।

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