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वॉट्सएप पर Fake News जांचने वाली नंबर की सच्चाई क्या है?

आने वाले लोकसभा चुनावों की वजह से WhatsApp ने भारत में एक ऐसी सर्विस शुरु की है, जिससे फैक्ट बोले तो सच्चाई चेक किया जा सकता है। ऐसा पहली बार है जब WhatsApp की तरफ से फैक्ट चेक करने की सुविधा दुनिया के किसी भी हिस्से में शुरू की गई है। इस सुविधा का फायदा उठाने के लिए आपको फेक मैसेज को Checkpoint Tipline पर भेजना होगा, जो कि आपके फेक मैसेज को वेरिफाई करेगा।

आपको बता दें कि Checkpoint Tipline फैक्ट चेक करने वाली एक भारतीय स्टार्टअप कंपनी है। यहीं पर खबरों की फैक्ट चेकिंग होगी। फैक्ट चेकिंग के लिए वॉट्सएप की तरफ से 9643000888 नंबर भी जारी किया गया है। आपको हम स्टेप्स के साथ बताएंगे कि कैसे इस सुविधा का फायदा आप ले सकते हैं।

-> सबसे पहले आपको अपने कॉन्टैक्ट लिस्ट में 9643000888 नंबर को सेव करना होगा


-> फिर आप वॉट्सऐप में जाकर इस कॉन्टैक्ट को सर्च करेंगे। यहां पर आपको जिस भी नाम से नंबर सेव किया है, उसके चेकपॉइंट का ऑफिशियल वेरिफाइड अकाउंट बना हुआ आएगा।


-> आपको बता दें कि फैक्ट चेक 5 भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें इंग्लिश, हिंदी, तेलुगू, बंगाली और मलयालम भाषाएं शामिल हैं।


-> आपको जिस भी मैसेज पर शक होता है उसे उस नंबर पर भेज सकते हैं। यहां पर आप टेक्स्ट, वीडियो और इमेज को चुन सकते हैं।


-> मैसेज भेजे जाने के बाद टीम मैसेज को चेक करेगी और जो भी फर्जी खबर होगी उसे False, Misleading या Disputed का मार्क दिया जाएगा। वहीं, जो भी खबर सही होगी उसको True का लेबल दिया जाएगा।

क्या है वॉट्सएप नंबर की सच्चाई?

सच्चाई ये है कि Checkpoint Tipline हेल्पलाइन नंबर नहीं है बल्कि एक रिसर्च प्रोजेक्ट है। यह प्रोटो (Proto) द्वारा चलाया जा रहा रिसर्च प्रोजेक्ट है। हमने वॉट्सएप के इस नंबर का इस्तेमाल किया और पाया कि इसमें किसी प्रकार की फैक्ट चेक करने की सेवा नहीं दी जा रही है।

Whatsapp Checkpoint Tipline number

हमने चेकप्वॉइंट टिपलाइन के नंबर पर एक खबर भेजा जिसके बाद उधर से मैसेज आया कि ‘क्या आप इस आइटम को वेरिफाई करना चाहते हैं। हां के लिए 1 और नहीं के लिए 2 भेजें”

वैसे तो ऐसा रिप्लाई देना ही नहीं चाहिए क्योंकि कोई भी यूजर्स तभी मैसेज करेगा जब उसे किसी खबर, तस्वीर या वीडियो पर फेक होने संदेह हो। लेकिन यहां पूछा जा रहा है कि सत्यता जांचने के लिए 1 और नहीं के लिए 2 लिखकर भेजें। जब हमने 1 लिखकर भेजा तो उधर से जवाब में जल्द ही रिप्लाई करने की बात कही गई।

आपको जानकर अजीब लगेगा कि लगभग एक दिन बाद Checkpoint की ओर से एक और मैसेज आया। मैसेज में लिखा था कि अगर आप हमसे जुड़े रहना चाहते हैं, तो टच में रहे अथवा कुछ ना करें। जिसके बाद हमने पहले भेजी हुई खबर की सत्यता के बारे में पूछा। लेकिन कंपनी का फिर से वहीं ऑटो जनरेटेड मैसेज मिला जिसमें लिखा था कि क्या आप इस आइटम की जांच करना चाहते हैं।

हमारा फैसला-

हमने अपनी जांच पाया कि यह एक रिसर्च प्रोजेक्ट है। चेकप्वाइंट ने अपनी वेबसाइट पर फैक्ट चेकिंग प्रोजेक्ट की जानकारी दी है। इस रिसर्च प्रोजेक्ट में चेकप्वाइंट टिपलाइन रिसर्च के लिए डाटा इकट्ठा करने का काम कर रही है। ये वही डाटा है जो आप उन्हें भेज रहे हैं।

हालांकि PTI की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस नंबर पर फेक न्यूज +919643000888 भेजने पर बताया जाएगा कि आपके द्वारा भेजी गई खबर (लिंक, फोटो, वीडियो) झूठ है या सच है। लेकिन फिलहाल हमने नंबर पर फेक न्यूज भेजा तो ऐसी बात सामने नहीं आई। ऐसा भी हो सकता है कि खबर वेरिफाई करने का प्रोसेस बहुत धीरे हो या बहुत ज्यादा संख्या में लोग फेक न्यूज भेज रहे हो। शायद कंपनी का कुछ दिनों बाद फेक न्यूज वेरिफाई करके यूजर्स को भेजने का प्लान हो। आप खुद इस नंबर पर फेक न्यूज भेजकर जांच कर सकते हैं।

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