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वर्ल्ड कप के शर्मनाक रिकॉर्ड

वर्ल्ड कप के शर्मनाक रिकॉर्ड, जो इतिहास में दर्ज है

पहली बार साल 1975 में वनडे वर्ल्ड कप खेला गया था। उसके बाद से अब तक वर्ल्ड कप में कई शानदार मुकाबले देखने को मिले हैं। हमने वर्ल्ड कप में कई बड़े रन चेज, करीबी अंतर से जीत-हार वाले मैच, कम स्कोर और बहुत ज्यादा स्कोर वाले मैच देखे हैं। वर्ल्ड कप में कई बड़े- बड़े रिकॉर्ड बने हैं। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं वर्ल्ड कप के शर्मनाक रिकॉर्ड के बारे में, जिसे कोई भी टीम या खिलाड़ी याद नहीं करना चाहेगा।

दक्षिण अफ्रीका का नॉकआउट मैचों में खराब रिकॉर्ड

दक्षिण अफ्रीका टीम का नॉकआउट मैचों में हमेशा ही प्रदर्शन खराब रहा है। ये टीम पहली बार साल 1992 में वर्ल्ड कप खेलने के लिए उतरी थी, तब दक्षिण अफ्रीका की टीम सेमीफाइनल तक पहुंची थी लेकिन बारिश के कारण मैच बाधित हो गया और ऐसे में टीम को एक गेंद पर 22 रनों का लक्ष्य मिला।

जो यकीनन कोई नहीं कर सकता है तो दक्षिण अफ्रीका को इस मैच में 19 रनों से हार का सामना करना पड़ा था। दक्षिण अफ्रीका का नॉकआउट मैचों में सबसे अच्छा प्रदर्शन साल 2015 के वर्ल्ड कप में रहा है जब उन्होंने क्वार्टर फाइनल में श्रीलंका को हराया था। हालांकि सेमीफाइनल में उसे न्यूजीलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था।

सुनील गावस्कर की धीमी बल्लेबाजी

भारतीय टीम की ओर से सुनील गावस्कर के नाम एक शर्मनाक रिकॉर्ड भी दर्ज है। पहले वर्ल्ड कप में इंग्लैंड और भारत के बीच में मैच खेला गया था जिसमें पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 60 ओवरों में 334 रन बनाए जो उस समय वनडे क्रिकेट का सबसे ज्यादा स्कोर था, लेकिन भारतीय टीम की तरफ से सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने 174 गेंदों पर 36 रन की धीमी पारी खेली और नॉटआउट रहे। जिस कारण टीम इंडिया को 202 रनों से हार का सामना करना पड़ा था।

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एक पारी में सबसे अधिक रन देने का रिकॉर्ड

वर्ल्ड कप 1983 के पहले मैच में न्यूजीलैंड के मार्टिन स्नेडन ने इंग्लैंड के खिलाफ 12 ओवरों में 105 रन देकर 2 विकेट लिए थे। हालांकि ये दोनों विकेट महत्वपूर्ण थे जो एलन लैम्ब और माइक गेटिंग के थे। इस मैच में न्यूजीलैंड को हार का सामना करना पड़ा था। ये बॉलिंग के हिसाब से वर्ल्ड कप के शर्मनाक रिकॉर्ड में शामिल है।

एक पारी में सबसे ज्यादा एक्सट्रा देने का रिकॉर्ड

1999 वर्ल्ड कप में मोईन खान और मोहम्मद युसूफ की शानदार बैटिंग की वजह से पाकिस्तान ने पहली पारी में स्कॉटलैंड के खिलाफ 261 रन बनाए। इस मैच में स्कॉटलैंड के गेंदबाजों ने अतिरिक्त 59 रन दिए थे जिसमें 5 बाई, 6 लेग बाई, 33 वाइड और 15 नो गेंद थी।

टीम द्वारा सबसे कम रन बनाने का रिकॉर्ड

साल 2003 के वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ बल्लेबाजी करने उतरी कनाडा की पूरी टीम 18.4 ओवरों में 36 रन बनाकर ऑलआउट हो गई थी। श्रीलंका ने इस मैच को 4.4 ओवरों में ही जीत लिया था। इसके अलावा वर्ल्ड कप 1979 में कनाडा की टीम इंग्लैंड के खिलाफ और साल 2003 में नामीबिया की टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 45 रन के स्कोर पर ऑलआउट हो गई थी। ये बल्लेबाजी के लिहाज से किसी भी टीम की तरफ से वर्ल्ड कप के शर्मनाक रिकॉर्ड में शामिल है।

सबसे अधिक बार शून्य पर आउट होने का रिकॉर्ड

वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा जीरो पर आउट होने का रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के नाथन एस्टल और पाकिस्तान के एजाज अहमद के नाम है। नाथन एस्टल ने वर्ल्ड कप में 22 मैच खेलते हुए 403 रन बनाए हैं और 5 बार शून्य पर आउट हुए हैं जबकि एजाज अहमद 29 मैचों की 26 पारियों में 516 रन बनाए हैं और 5 बार शून्य पर आउट हुए हैं।

सर्वाधिक बार लगातार शून्य पर आउट होने का रिकॉर्ड

कनाडा के खिलाड़ी निकोलस डी ग्रूट और केन्या के शेम एनगोचे लगातार वर्ल्ड कप के 3 मैचों में जीरो पर आउट हुए हैं।

सर्वाधिक हार का रिकॉर्ड

साल 1983 से वर्ल्ड कप में एंट्री करने वाली जिम्बाब्वे की टीम ने अपने डेब्यू वर्ल्ड कप मैच में ही ऑस्ट्रेलिया जैसी बड़ी टीम को हरा दिया था लेकिन अगले ही मैच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। साल 1983 से 2015 तक उन्होंने कुल 58 वर्ल्ड कप मैचों में हिस्सा लिया जिसमें उन्हें 42 मैचों में हार मिली है।

सबसे अधिक मैचों में लगातार हार

ऑस्ट्रेलिया को पहले मैच में हराने के बाद जिम्बाब्वे को 9 साल तक जीतने का इंतजार करना पड़ा था। उनके लगातार हार का सिलसिला 1992 में आकर टूटा जब उन्होंने इंग्लैंड को एक ‘लो-स्कोरिंग मैच’ में उन्हें हराया। इस बीच उन्हें 18 लगातार मैचों में हार का मुंह देखना पड़ा था।

टीम द्वारा सबसे कम रन रेट से बनाया गया स्कोर

शुरुआती वर्ल्ड कप में 4 का रन रेट काफी अच्छा माना जाता था। अपनेे दूसरे वर्ल्ड कप में कनाडा की टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ साल 1979 में 40.3 ओवर्स में 45 रन बनाकर ऑलआउट हो गई थी। कनाडा की टीम ने 1.11 रन प्रति ओवर के हिसाब से रन बनाए थे। ये वर्ल्ड कप इतिहास में किसी भी टीम के द्वारा सबसे कम रनरेट से बनाया गया स्कोर है।

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