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Worlds Dangerous Serial Killer Thug Behram Killed 931 People TIC Story
Worlds Dangerous Serial Killer Thug Behram Killed 931 People TIC Story

रुमाल को हथियार बनाकर किया था 931 कत्ल, ये है दुनिया का सबसे ‘खतरनाक ठग’

सीरियल किलर के रूप में ठग बहराम पूरे विश्व में मशहूर है। इस खूनी का जन्म साल 1765 में हुआ था। 50 सालों के अंदर ठग ने सिर्फ रुमाल के जरिए गला घोंटकर 900 से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। ठग को 75 साल की उम्र में पकड़ लिया गया था। और साल 1840 में उसको फांसी की सजा दी गई थी।

 

तत्कालीन सरकार में ठगों और डकैतों पर काम करने वाले जेम्स पैटोन ने लिखा था कि बहराम ठग ने वाकई में 931 लोगों की हत्या कर दी थी। उसने उनके सामने ही इन हत्याओं के बारें में सारी बातें स्वीकारी थी।

 

उस समय के ठग आज के ठगों से बहुत अलग होते थे। आज धोखाधड़ी करने वालों को ठग कहा जाता है लेकिन उस वक्त ठग बहुत ही खूंखार तरह के लोग होते थे। इन ठगों का एक पूरा गिरोह होता था। जो काफिलों में अपना वेष बदलकर साथ लग जाता था। उसके बाद जैसे ही मौका इन ठगों के हाथ लगता था तभी  लोगों की हत्या और लूट को अंजाम दे देते थे।

 

पीले रुमाल से किया 900 लोगों का कत्ल

आपको बता दें कि बहराम के लिए ऐसा कहा जाता था कि वह एक बार जिस रास्ते से गुजरता था, वहां लाशों का ढेर लग जाता था। ठग का हथियार होता था एक पीले रंग का रुमाल। इसी रुमाल से बहराम अपने शिकार को मौत की नींद सुलाता था। दिल्ली से लेकर ग्वालियर और जबलपुर तक इस खूनी ठग का दबदबा था। इस ठग का खौफ इस कदर हो गया था कि व्यापारियों ने रास्ते में चलना बंद कर दिया था।

 

गायब हो जाता था पूरा का पूरा काफिला

व्यापारियों, पर्यटकों, सैनिकों और तीर्थयात्रियों का पूरा काफिला रहस्यमय तरीकों से अचानक गायब हो जाता था। लेकिन इन सबमें हैरानी की बात यह थी कि पुलिस को लगातार गायब हो रहे इन लोगों की लाशें तक नहीं मिलती थी। 1809 मे अंग्रेज अफसर कैप्टन विलियम स्लीमैन को गायब हो रहे लोगों के रहस्य का पता लगाने की जिम्मेदारी सौपी गई थी।

 

कैप्टन स्लीमैन ने अपनी जांच में इस बात का खुलासा किया था कि बहराम ठग का गिरोह इस काम को अंजाम देता है। उस समय बहराम के गिरोह में करीब 200 सदस्य हुआ करते थे। जब प्रशासन को इस गिरोह के बारे में पता चला तो उन्होंने इसके बाद ठगों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी थी। इन ठगों को पकड़ने के लिए बाकयदा एक विभाग बनाया गया था जिसका मुख्यालय जबलपुर में था। स्लीमैन ने दिल्ली से लेकर जबलपुर तक के हाईवे के किनारे जंगलों को साफ करा दिया था। और साथ ही गुप्तचरों का एक बडा जाल भी इस गिरोह के लोगों को पकड़ने के लिए बिछाया था।

 

अलग थी भाषा

इन ठगों की बातचीत करने के लिए एक अलग भाषा होती थी। जिसके लिए गुप्तचरों की मदद ली जाती थी ताकि इनकी भाषा को समझने में मदद मिलें। जिस भाषा में यह ठग बात करते थे। इसे ‘रामोसी’ कहते थे। रामोसी एक सांकेतिक भाषा थी। जिसे ठग अपने शिकार को खत्म करते वक्त इस्तेमाल करते थे।

 

10 साल बाद चढ़ा हत्थे

कैप्टन स्लीमैन को ठग बहराम को पकड़ने में करीब 10 साल से ज्यादा का वक्त लगा था। ठग को गिरफ्तार करने के बाद उसने बताया कि उसके गिरोह के लोग व्यापारियों का भेष बनाकर जंगलों में घूमते रहते थे। व्यापारियों के भेष में इन ठगों का पीछा बाकी गिरोह वाले करते थे। और तभी रात के अंधेरे में जंगल के पास इन काफिलों को शिकार बना लिया जाता था। धर्मशाला और बाबड़ी जैसी जगहों के पास भी गिरोह हमेशा सक्रिय रहता था।

 

ऐसे करते थे शिकार

काफिले के लोग जब सो जाते थे तब ठग गीदड़ के रोने की आवाज में हमला करने का संकेत दिया करते थे। इसके बाद गिरोह के साथ बहराम ठग वहां पहुंचता था। और अपने पीले रुमाल में सिक्का बांधकर काफिले के लोगों का गला घोंटता था। हत्या करने के बाद लोगों की लाशों को कुंओं आदि में दफन कर देता था। बहराम को गिरफ्तार करने के बाद उसके गिरोह के बाकी सदस्यों को भी धीरे-धीरे गिरफ्तार कर लिया गया था।

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